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भट्टा पारसौल से फिर शुरू हुई अपने हक की लड़ाई

Mon, 16 Feb 2015 11:54 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नोएडा
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नोएडा के भट्टा-पारसौल के किसान एक बार फिर मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए हैं। इस बार भी वहीं समस्याएं हैं। किसानों ने आंदोलन की शुरुआत उसी स्थान से की है, जहां साल 2011 में खूनी संघर्ष हुआ था। आंदोलन की रणनीति और अनिश्चितकालीन धरना रविवार से शुरू हो गया था, जो 20 फरवरी के बाद आमरण अनशन में बदल जाएगा।
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धरने के दौरान  मनवीर तेवतिया ने कहा कि भाजपा ने भूमि अधिग्रहण कानून में बदलाव कर उसे पूरी तरह से किसान विरोधी बना दिया है।  प्रदेश सरकार कहती है कि वह किसान हितैषी है लेकिन किसानों के खिलाफ काम कर रही है। किसानों से जबरन उनकी जमीनों को खरीदा जा रहा है।

प्रदेश सरकार ने किसानों को छह गुना मुआवजा देने की घोषणा की थी, मगर अब अपनी ही बातों से मुकर रही हैं। किसानों की समस्याओं का जब तक हल नहीं किया जाएगा तब तक आंदोलन किया जाएगा। धरने पर जयप्रकाश, हरदन प्रधान, विजय प्रधान, सुखवीर सिंह, प्रेमपाल मलिक, हरपाल सिंह, वीरपाल, प्रेमवीर, चंद्रशेखर, सूरज पाल, श्योबीर सिंह मौजूद रहे।
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पिछली बार से बदला हुआ होगा
इस बार किसानों का आंदोलन पिछले आंदोलन से भिन्न रहेगा। किसानों ने निर्णय लिया है कि वह ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे, जिससे कानून हाथ में लिया जाए। किसानों का कहना है कि वह शांतिपूर्वक धरना देंगे और 20 से अनशन शुरू कर देंगे।
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किसानों की मांगें
जमीन के बदले आधी जमीन विकसित करके दी जाए
25 फीसदी जमीन मिक्स लैंडयूज करके दी जाए
इसको पूरी तरह नि:शुल्क रखा जाए
जमीन को फ्रीहोल्ड किया जाए
मीट का निर्यात बंद कराया जाए
किसान की जमीन 50 फीसदी ली जा रही है, उसका मुआवजा दे लेकिन जिस रेट से बेची जा रही है उसके औसत का 60 फीसदी दें
बेची गई जमीन पर किसानों का कोई अधिकार न हो
किसानों की हर फसल का समर्थन मूल्य घोषित हो
सड़क, कंपनी और अन्य कार्य के लिए ली गई जमीन को लीज पर लें और किराया दें
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