नई दिल्ली।
दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मुकदमेबाज को फटकार लगाई है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के जज के आधिकारिक काम के लिए एफआईआर दर्ज कराने की अनुमति सीधे रिट याचिका दायर करके नहीं मांगी जा सकती। मुख्य न्यायमूर्ति देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की खंडपीठ ने मुकदमेबाज को चेतावनी दी कि कोर्ट की कार्यवाही का वीडियो यूट्यूब पर अपलोड करना न तो उनके हित में है और न ही न्यायिक संस्था के हित में।
याचिकाकर्ता ने रिट याचिका दायर कर जिला अदालत के एक जज के अप्रैल 2024 के आदेश को ‘जाली’ और ‘मनगढ़ंत’ बताते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि जज ने विपक्षी पक्ष के पक्ष में आदेश बनाने के लिए जालसाजी की और उनके रिक्यूजल (खुद को मामले से अलग करने) के अनुरोध को ठुकरा दिया। अदालत ने याचिकाकर्ताओं की इस बात पर भी नाराजगी जताई कि उन्होंने ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही का वीडियो यूट्यूब पर अपलोड कर दिया। मुख्य न्यायमूर्ति ने कहा कि यह खुली अदालत है। आप सैकड़ों वकीलों के सामने अपनी दलीलें पेश कर रहे हैं। क्या आपको लगता है कि आपकी शिकायतें नहीं सुनी जाएंगी कि आप यूट्यूब का सहारा ले रहे हैं? हम आपको चेतावनी दे रहे हैं ऐसा मत कीजिए। यह न आपके हित में है और न ही संस्था के हित में।