मुरादनगर के असालतनगर गांव की 25 वर्षीय युवती अपराजिता भी इस बार ग्राम प्रधान पद की दौड़ में है। अपराजिता ने बीटेक, एमटेेक, आईआईटी रिसर्च के बाद राजनीति का रास्ता चुना है।
मुरादनगर की इस बेटी के पास जर्मनी की एक मल्टीनेशनल कंपनी से पांच लाख के पैकेज पर नौकरी का ऑफर था, मगर उसने नौकरी के बजाय गांव से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया है।
अपराजिता दिल्ली सरकार में स्वास्थ्य विभाग में एडिशनल निदेशक के पद पर तैनात डाॅ. शिवराज सिंह की इकलौती बेटी है। असालतनगर ग्राम प्रधान की सीट एससी वर्ग में आरक्षित है।
मोदीनगर के सेंट टेरेसा स्कूल से बारहवीं की पढ़ाई करने के बाद अपराजिता ने चेन्नई स्थित एसआरएम विश्वविद्यालय से बीटेक किया और नोएडा स्थित एमिटी संस्थान से एमटेक किया।
अपराजिता ने एक वर्ष पूर्व आईआईटी दिल्ली से रिसर्च किया है। अपराजिता का कहना है कि राजनीति में फैली गंदगी को साफ करने के लिए युवाओं को अपने हाथ में झाड़ू उठानी होगी।
अच्छे लोगों के आने से ही राजनीति से बुरे लोग बाहर होंगे। यही संकल्प लेकर वह ग्राम प्रधान के चुनाव से राजनीति की शुरूआत करने जा रही हंै। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल से प्रभावित अपराजिता का कहना है कि अच्छे और पढे़ लिखे लोगों को राजनीति में आना चाहिए।
उनके माता-पिता ने हौसला बढ़ाया, इसलिए वह आज राजनीति में हैं। अपराजिता का कहना है कि यह तो शुरूआत है। राजनीति की पहली सीढ़ी चढ़कर देश की राजनीति में भागीदारी करना ही उनका सपना है।