पूस की सर्द रात में बीमार परिवार की राहत के लिए राकेश ने अंगीठी जलाई थी। साथ ही कमरे के दरवाजे और खिड़की को भी बंद कर दिया था। गरमाहट के लिए यही लालच जानलेवा साबित हुआ। अलीपुर के खेड़ा कलां गांव में रहने वाले लोग राकेश, उनकी पत्नी व दो मासूम बच्चों की मौत से स्तब्ध हैं। सभी इस बात का चर्चा कर रहे हैं कि एक छोटी सी गलती ने पूरे परिवार को लील लिया।
खतरनाक है बंद कमरे में अंगीठी जलाना, हो सकता है हादसा
बंद कमरे में अंगीठी जलाकर सोना खतरनाक है। कमरे में कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से कमरे के अंदर रहने वाले लोग बेहोश हो सकते हैं और कुछ देर बाद मौत तक हो सकती है।
ऐसी घटनाओं में मरने वाले को कुछ पता भी नहीं चलता। यहीं कारण है कि वह मदद के लिए गुहार भी नहीं लगा पाते। इस बारे में एम्स के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर के गुप्ता का कहना है कि कोयला या लकड़ी डालकर अंगीठी जलाना खतरनाक है। इससे कमरे में कार्बन मोनो-ऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें निकलती हैं। अगर कोई बंद कमरे में अंगीठी जलाकर सोता है तो कमरे में कार्बन मोनोऑक्साइड गैस का स्तर काफी बढ़ जाता है। इससे अंदर रहने वाले बेहोश हो सकते हैं उसके बाद व्यक्ति की जान भी जा सकती है।
दिल्ली में हुई छह मौत के पीछे भी यहीं कारण रहा होगा। यह ऐसी घटना है जिसमें मरने वाला मदद के लिए गुहार भी नहीं लगा पाते। यह दर्द रहित मौत है। इसमें मरने वाले को कुछ पता ही नहीं चल पाता। उन्होंने कहा कि बंद कमरे में अंगीठी जलाने से बचना चाहिए। यदि कोई जलाता भी है तो कमरे में कोई न कोई खिड़की खोलकर रखनी चाहिए। सोने से कुछ समय पहले अंगीठी को बंद कर देना चाहिए।
बंद कमरे में अंगीठी, ब्लोअर से घुट सकता है दम
विशेषज्ञों का कहना है कि धुएं के कारण बंद कमरे में दम घुटने से लोगों की मौत हो सकती है। अंगीठी जलाने से कार्बन मोनो ऑक्साइड निकलती है। यह जहरीली गैस सांस की नली से अंदर जाने के बाद दिमाग में खून की सप्लाई बाधित कर देती है। इससे दम घुट जाता है। अंगीठी ही नहीं, रूम हीटर या ब्लोअर भी बंद कमरे में ऐसी जहरीली गैसें बना देते हैं, जो जीवन के लिए संकट खड़ा कर सकती हैं।
बरतें यह सावधानी