सेक्टर-27 स्थित कैलाश अस्पताल में भाई दानिश की देखभाल कर रहे मोहम्मद सरताज का कहना है कि अपने पैतृक गांव बिसाहड़ा जाने से डर लगता है।
भले ही लाख आश्वासन दिए जाएं लेकिन गांव में परिवार की जान को खतरा है। प्रदेश सरकार गांव से दूर कोई सुरक्षित ठिकाना मुहैया कराए, जहां उसका परिवार जाकर बस सके।
सरताज ने कहा कि हमारे पास इतने रुपये नहीं हैं एक किसी दूसरे शहर में मकान खरीद सके। सरकार से अपील है कि गांव से दूर कहीं सुरक्षित ठिकाना दिया जाए।
सरताज ने व्हाट्सप पर मीडिया का एक ग्रुप बनाया है, जिसके जरिए कहा है कि सरकार को लिखे पत्र का यह बिल्कुल अर्थ नहीं था कि मीडिया को गांव से हटा दिया जाए, या जाने से रोक दिया जाए।
'हैवानियत भरी घटना से जनता को कराया रूबरू'
उन्होंने कहा कि पूरे मीडिया का धन्यवाद करना चाहता हूं, जिसने हैवानियत से भरी घटना से हिंदुस्तान की जनता को रूबरू कराया है। उससे एक उम्मीद मिलती है कि मीडिया ही इंसाफ दिलाने में भरपूर सहयोग कर सकता है।
सरताज ने बताया कि दानिश दादरी में एक कोचिंग सेंटर में प्रशासनिक सेवा की तैयारी कर रहा था। अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में बैठने के लिए उसी ने उससे कहा था ताकि तैयारी अच्छी हो सके।
दानिश ने इतिहास और राजनीतिक शास्त्र में ग्रेजुएशन किया है। इस बार यूपीपीसीएस व एसएससी का फार्म भरा है। सरताज सात साल से भारतीय वायु सेना(तकनीकी विभाग) में है और चेन्नई में तैनात है।
सरताज ने अपने भाई दानिश को जामिया विश्वविद्यालय में दाखिला लेने और स्कॉलरशिप परीक्षा देने के लिए कहा था ताकि पढ़ाई और कोचिंग का खर्चा निकल सके।
सरताज ने बताया कि 28 सिंतबर की रात को घटना से कुछ ही समय पहले परिवार के सदस्यों से बात हुई थी, तब सब कुछ ठीक था। पिता इकलाख पहले लुहार का काम करते थे, इसके बाद घरों में बिजली का काम करके जीविका चलाते थे।
दहशत में इकलाख का परिवार
बिसाहड़ा गांव में भीड़ के हमले के शिकार इकलाख का परिवार बेहद दहशत में है। शनिवार को गांव में उत्पन्न उग्र स्थिति के बाद परिवार के लोग बेहद चिंतित हैं। मृतक इकलाख के कुनबे के भाई शौकीन ने बताया कि परिवार बेहद दहशत में है।
उनका कहना है कि गांव में माहौल अच्छा नहीं है। उनके एक और संबंधी का कहना है कि परिवार प्रशासन की सुरक्षा पर पूरी तरह से निर्भर कर रहा है। परिवार का मानना है कि प्रशासन से सुरक्षा मिलती रही तो वह वहां रहेंगे।
अगर कभी भी उन्हें ऐसा लगा कि सुरक्षा पर खतरा है तो वह अगला कदम सोचेंगे। उन्होंने यह बातें अरविंद केजरीवाल से भी कहीं। उन्होंने क्षेत्र में समाधान सेना और प्रताप सेना के सक्रिय होने की बात से इंकार नहीं किया।
लेकिन उन्होंने पुष्टि नहीं की। हालांकि गांव के प्रधान ने किसी तरह की सेना के गांव में सक्रिय होने से इंकार किया। उनका कहना है कि गांव में ऐसी किसी भी सेना का कोई भी सदस्य नहीं रहता।