एनएच-2 (दिल्ली-आगरा नेशनल हाईवे) की पहले ही दुर्दशा हो चुकी है, अब 25 किलोमीटर लंबे बाईपास के हालात भी बिगड़ गए हैं। ऐसे में हाईवे से रोजाना गुजरने वाले लाखों वाहनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों के दौरान हाईवे से ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए बनाए गए बाईपास रोड का महज छह साल में ही दम निकल गया है। हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि स्थानीय जनप्रतिनिधि इस जर्जर मार्ग को नेशनल हाईवे बनाने का सपना शहरवासियों को दिखा रहे हैं। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण ने तो इसका प्रस्ताव भी सरकार को भेज दिया है।
बदरपुर बॉर्डर स्थित सेक्टर 37 से सेक्टर-59 तक बाईपास के निर्माण की योजना 2008 में बनी थी। कॉमनवेल्थ गेम्स को ध्यान में रखकर करीब 130 करोड़ रुपये की लागत से इसका अधिकांश हिस्सा बना लिया गया था।
सूत्रों के मुताबिक बाईपास की सड़क 160 एमएम की बनाई जानी थी, लेकिन उस वक्त ट्रैफिक के कम दबाव को देखते हुए थिकनेस आधी रखी गई। वाहन बढ़ने पर दोबारा सड़क बनाने की योजना थी लेकिन छह साल में ही बाईपास की हालत खस्ता हो गई है। इस बार मानसून की बारिश ने हालात और बिगाड़कर रख दिए हैं।
बल्लभगढ़ से लेकर बदरपुर तक बाईपास पर जगह-जगह गढ्ढे बने हुए हैं। सड़क की हालत जर्जर हो गई है। हालांकि, करीब डेढ़ साल पहले हुडा ने इसकी मरम्मत के लिए 37 करोड़ रुपये का एस्टिमेट तैयार कर सरकार को भेजा था लेकिन अब तक इसको मंजूरी नहीं मिली है।
स्मूद ट्रैफिक की राह में स्लम सबसे बड़ी बाधा
बाईपास रोड के निर्माण के दौरान सबसे बड़ी समस्या यहां अवैध कब्जों ने खड़ी की थी। हालांकि, जैसे तैसे बाईपास का काम पूरा कर लिया गया। इस बीच हुडा ने स्लम में रहने वाले लोगों को आशियाना फ्लैट भी बनाकर दिए लेकिन हालात अब भी जस के तस बने हुए हैं।
ऐसे में नेशनल हाईवे का सपना स्लम तोड़ सकता है, क्योंकि हाईवे के भी मानक होते हैं। फिलहाल बाईपास पर जगह-जगह झुग्गियां, सड़क के बीचोबीच घूमते मवेशी और सड़क के गड्ढे वाहनों की रफ्तार थाम रहे हैं।
ट्रैफिक लाइटें पड़ी हैं खराब
यातायात व्यवस्था को सुचारु रूप से चलाने के लिए बाईपास के सभी प्रमुख चौराहों और तिराहों पर ट्रैफिक सिग्नल लगाए गए थे, लेकिन जानकर हैरानी होगी की लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए सिग्नल वर्षों से शोपीस बने हुए हैं। यहां से गुजरने वालों ने शायद ही कभी इन सिग्नलों को सुचारु रूप से काम करते देखा होगा।