अशोक विहार में मानसिक दिव्यांग किशोर के साथ सामूहिक कुकर्म के बाद मौत के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर भी सवालिया निशान लगे है। पीड़ित पिता ने बताया कि आरोपियों की धमकी से डरने के बावजूद वह 20 जून को सेक्टर-5 थाना में शिकायत के लिए पहुंचा। लेकिन शिकायत दर्ज करने की बजाय कई घंटों तक थाने में बैठाए रखा।
पुलिस तीन आरोपियों को पकड़कर भी लेकर आई, लेकिन पुलिस ने कार्रवाई की बजाय समझौता कराने की कोशिश करने लगी। परिजनों का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने कहा कि पीड़ित मानसिक दिव्यांग है कुछ भी बोल रहा है। ये तीनों इसके इलाज का खर्च उठा लेंगे। इसके बाद पिता निराश होकर वापस घर आ गए।
पीड़ित पिता इतने डर गए कि उन्होंन अपने बच्चे का अस्पताल में ले जाकर इलाज नहीं कराया। इस घटना के बाद कॉलोनी में रहने वाली एक महिला आगे आई और उसने न्याय का भरोसा दिलाया। शुक्रवार दोपहर को किशोर की मौत के बाद उसके पिता ने निराश होकर अपनी रेहड़ी पर डालकर खेड़कीदौला क्षेत्र में शव फेंककर आ गए।
शुक्रवार शाम को जब महिला घर पर किशोर का हाल जानने के लिए आई तो उन्होंने कहा कि वह दादा-दादी के पास चला गया। महिला को कुछ शक हुआ तो उसने सेक्टर-5 थाना पुलिस को सूचित कर परिजनों से पूछताछ के लिए कहा। लेकिन इसके बाद भी पुलिस नहीं आई। शनिवार सुबह शक्ति वाहिनी स्वयंसेवी संस्था से जुड़ी महिला कर्मी आई और उन्होंने पीड़ित परिजनों से बातचीत की तो आखिरकार उन्होंने सारी सच्चाई बता दी।
घटना के बाद खेड़कीदौला क्षेत्र से शव को ढूंढकर वापस घर लाया गया और पुलिस को सूचना देने के बाद पोस्टमार्टम हाउस में रखवा दिया गया। बताया जा रहा है कि इस संबंध में मामला तूल पकड़ने के बाद थाना पुलिस ने आनन फानन में मामला दर्ज कर दिया। सेक्टर-5 थाना पुलिस के अतिरिक्त प्रभारी उप निरीक्षक कुंदन लाल ने बताया कि दो दिन पहले लड़ाई झगड़े का मामला सामने आया था। शनिवार दोपहर को पीड़ित के बयान दर्ज मामला दर्ज कर लिया गया।