नियमों की अनदेखी का आरोप
गोपनीयता भंग होने पर भी जताई चिंता
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम को यौन उत्पीड़न की शिकायत पर सेवा से बर्खास्त किए जाने पर शिक्षक संघ ने आपत्ति जताई है। संघ ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर नियमों की अनदेखी और गोपनीयता भंग करने का आरोप लगाया है। शिक्षक संघ का दावा है कि कुलपति ने कार्यकारी परिषद की मंजूरी के बिना यह आदेश जारी किया।
जेएनयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष सैयद अख्तर हुसैन और सचिव अविनाश कुमार ने बताया कि जेएनयू अधिनियम के स्टैच्यूट-30 के तहत किसी शिक्षक को बर्खास्त करने का अधिकार कार्यकारी परिषद के पास है। इस मामले में कार्यकारी परिषद की न तो बैठक बुलाई गई और न ही संबंधित दस्तावेज साझा किए गए। इससे कुलपति के आदेश की वैधानिक प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं। शिक्षक संघ ने आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) की सिफारिशें लीक होने पर भी चिंता जताई है। संघ ने प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की है।
गोपनीयता भंग और प्रक्रिया पर सवाल
शिक्षक संघ ने आईसीसी की सिफारिशें लीक होने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यौन उत्पीड़न की जांच से जुड़ी जानकारी गोपनीय होनी चाहिए। जानकारी सार्वजनिक होने से निर्धारित प्रक्रिया और गोपनीयता के नियमों का उल्लंघन होता है। पूर्व की जेंडर सेंसिटाइजेशन कमेटी अगेंस्ट सेक्सुअल हैरेसमेंट (जीएसकैश) में छोटे और बड़े दंड के स्पष्ट प्रावधान थे, जबकि मौजूदा आंतरिक समिति के नियमों में ऐसे प्रावधान स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं हैं।