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झज्जर में पंजाबियों और सैनियों पर ही निशाना क्यों?

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एक सवाल झज्जर की हिंसा में यह जरूर उठता है कि हिंसा का निशाना पंजाबियों और सैनियों को ही क्यों बनाया गया। शहर के जानकार लोग इसका अलग अलग कारण बताते हैं।
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वहीं जाट समाज अपने आप को हिंसा से अलग तो मानता है पर उकसावे की बात से इनकार भी नहीं करता। छावनी कालोनी के ज्यादातर लोगों ने बताया कि हमलावर जानते थे कि उन्हें सिर्फ सैनियों को निशाना बनाना है।

कई लोगों से उन्होंने जाति पूछी भी। इसकी वजह वे सांसद राजकुमार सैनी के जाट विरोधी बयानों को मानते हैं।  जहां तक पंजाबियों की दुकान को निशाना बनाने की बात है तो वहां भी इसकी वजह सीएम मनोहर लाल का पंजाबी होना ही बताया जा रहा है।
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विकास कहते है, हमारा शहर 20 साल पीछे चला गया

जानकारों का कहना है कि जाट समाज पंजाबी का सीएम होना पचा नहीं पा रहा है इसलिए आरक्षण की आड़ में  हिंसा हुई और पंजाबियों को आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। जाट समाज से जुड़ी दुकानों को नुकसान नहीं पहुंचाया गया।

जाट समाज के लोग इस हिंसा से अपने को कुछ हद तक अलग मानते हैं लेकिन यह भी कहते हैं कि उकसाने की हरकत दूसरी तरफ से हुई। जाट समाज छोटूराम का बड़ा सम्मान करता है।

समाज के नेता कहते हैं, झज्जर की जाट धर्मशाला को जलाते समय जब उपद्रवियों ने मूर्ति को नुकसान पहुंचाया तो युवा भड़क गए। इसी वजह से शहर में हिंसा हुई। जाट नेता ओमप्रकाश कहते हैं हमारे लोगों पर पत्थर फेंके गए।

इस हिंसा में साजिश से भी इनकार नहीं किया जा सकता। लेकिन इतना जरूर है जाट आरक्षण की आड़ में हुई हिंसा से झज्जर को गहरा झटका लगा है। जैसा कि एक कालेज में प्राध्यापक विकास कहते है, हमारा शहर 20 साल पीछे चला गया।
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