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फैसला: एनडीएमसी में भी बिजली सब्सिडी देगी दिल्ली सरकार

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दिल्ली सरकार अब नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (एनडीएमसी) के उपभोक्ताओं को भी कम बिजली खर्च करने पर सब्सिडी देगी। अभी तक बीएसईएस राजधानी, बीएसईएस यमुना पावर और टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रिब्यूशन लिमिटेड के उपभोक्ताओं को ही सरकार सब्सिडी देती है।
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विशेष बात है कि जिन मतदाताओं ने मुख्यमंत्री को चुना, उन्हें भी अब सब्सिडी मिलेगी। एनडीएमसी इन इलाकों में खुद बिजली आपूर्ति करती है। सूत्रों के अनुसार दिल्ली कैबिनेट ने बुधवार को एनडीएमसी के निवासियों को सब्सिडी देने के जिस प्रस्ताव को मंजूरी दी है, उससे इस क्षेत्र में रहने वाले ऐसे लोगों को लाभ मिलेगा जो मासिक 400 यूनिट से कम बिजली खर्च करते हैं।

सरकार को इससे करीब 20-25 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सब्सिडी का भार उठाना पड़ेगा। अभी सालाना बिजली सब्सिडी पर 1450 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।

एनडीएमसी को नहीं मिल पा रहा था फायदा

दिल्ली सरकार सब्सिडी ऐसे उपभोक्ताओं को देती है जो मासिक 400 यूनिट से कम बिजली खर्च करते हैं। इसमें 200 यूनिट तक खर्च करने वाले उपभोक्ता को प्रति यूनिट 2 रुपये और 200-400 यूनिट तक खर्च करने वालों को तीन रुपये की सब्सिडी मिलती है। तर्क है कि इससे बिजली की खपत में कमी आई है।

एनडीएमसी क्षेत्र में कुछ झुग्गी बस्ती हैं तो टाइप-एक व टाइप-दो के मकानों में रहने वाले सरकारी कर्मचारी हैं। दिल्ली सरकार के उच्च पदस्थ अधिकारी बताते हैं कि मार्च, 2015 में दिल्ली कैबिनेट दिल्ली वालों को बिजली पर सब्सिडी देने का फैसला किया था।

आम आदमी पार्टी का 50 फीसदी बिजली दाम कम करने का वादा भी था, लेकिन उस फैसले का फायदा एनडीएमसी को नहीं मिल पा रहा था क्योंकि यहां एनडीएमसी आपूर्ति करती है। छावनी क्षेत्र का भी वहीं हाल है। हालांकि अभी छावनी क्षेत्र को फायदा नहीं मिलेगा।
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डीएमआरसी को वैट क्षतिपूर्ति की जगह ब्याजमुक्त लोन

दिल्ली सरकार अब दिल्ली मेट्रो रेल कार्पोरेशन को वैट की क्षतिपूर्ति करने की बजाय उतनी राशि का ब्याज मुक्त लोन देगी। कैबिनेट ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। डीएमआरसी को यह फेज-तीन के वैट के तौर पर दी गई 1550 करोड़ रुपये की राशि 20 साल के लिए ब्याज मुक्त लोन के तौर देगी दी जाएगी।

इससे पहले दिल्ली सरकार ने मेट्रो फेज-एक व फेज-दो में वैट की क्षतिपूर्ति के तौर पर डीएमआरसी को राशि दी थी। सरकार का तर्क है कि डीएमआरसी में केंद्र सरकार की भी भागीदारी है तो फिर सिर्फ दिल्ली सरकार अपना टैक्स क्यों वापस करे।

इसी कड़ी में लंबे समय से इस राशि की मांग चल रही थी। अब जो पैटर्न फेज-तीन के लिए अपनाया जा रहा है, संभवत: भविष्य में फेज-चार में मिलने वाले वैट में भी अपनाया जाए। हालांकि यह राशि जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी से लिया गया लोन खत्म होने के बाद लौटानी है।
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