दिल्ली विश्वविद्यालय में शुक्रवार को अकादमिक परिषद की बैठक होने जा रही है। इस बैठक में स्नातक के चार वर्षीय जर्नलिज्म, अंग्रेजी, पर्शियन, अरबी, उर्दू, पंजाबी, बीबीए, बिजनेस इकोनॉमिक्स, सोशल वर्क, राजनीति विज्ञान समेत अन्य कई कोर्सेज के चौथे, पांचवें व छठे सेमेस्टर के पाठ्यक्रम पर चर्चा होगी। वहीं सोशियोलॉजी के चौथे व पांचवें सेमेस्टर के पाठ्यक्रम पर चर्चा की जाएगी।
जनजातीय अध्ययन पर एक केंद्र शुरु होगा:
दिल्ली विश्वविद्यालय समाज में जनजातीय नेताओं के योगदान के विषय में छात्रों को शिक्षित करने के लिए एक जनजातीय अध्ययन केंद्र शुरु करेगा। यह एक बहु विषयक केंद्र होगा। इस आशय का प्रस्ताव शुक्रवार को अकादमिक परिषद की बैठक में पेश किया जाएगा। नए केंद्र का उद्देश्य जनजाति शब्द को समझना, सामाजिक, सांस्कृतिक, भाषाई, धार्मिक, आर्थिक और पर्यावरणीय विविधता और समानताओं का अध्ययन करना शामिल है। इसके तहत छात्रों को जनजातियों की विभिन्न लोक परंपराओं का अध्ययन करने और उनके दस्तावेज तैयार करने का अवसर भी मिलेगा।
डीयू की अकादमिक परिषद की बैठक में स्वतंत्रता व विभाजन अध्ययन केंद्र को स्थापित करने का प्रस्ताव भी लिया जा रहा है। शोध में ऐसे लोगों और घटनाओं के अध्ययन को बढ़ावा दिया जाएगा जिन्हें इतिहास में उपेक्षित कर भुला दिया गया है। बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगने की उम्मीद है। इसके अलावा एलएलबी के पांच वर्षीय दो नए कोर्सेज पर भी मुहर लग जाएगी। डीयू में शैक्षणिक सत्र 2023-24 से एकीकृत शिक्षक शिक्षा (इंटीग्रेटेड टीचर एजुकेशन) आईटीईपी कोर्स चलेगा। इसमें सेंट्रल यूनिवर्सिटी एंट्रेस टेस्ट (सीयूईटी) की बजाए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की ओर से आयोजित प्रवेश परीक्षा के माध्यम से दाखिले स्वीकार किए जाएंगे। इस आशय का प्रस्ताव भी बैठक के एजेंडे में है। इस प्रस्ताव पर काफी शिक्षक पहले से ही विरोध जता रहे हैं।