दिल्ली का स्वराज कानून हर पार्षद को चेयरमैन बना देगा। सरकार जिस स्वराज कानून का ड्राफ्ट तैयार कर रही है, उसमें प्रत्येक वार्ड में दस मोहल्ला सभा होंगी और उनका चेयरमैन पार्षद होगा।
मसलन दिल्ली की राजनीति में सबसे छोटा नुमाइंदा पार्षद नहीं, बल्कि मोहल्ला सभा के प्रतिनिधि होंगे। सभा में किन-किन लोगों को शामिल किया जाएगा, इसे लेकर चर्चा चल रही है। मंगलवार को सचिवालय में स्वराज कानून को लेकर कई बैठकें हुईं।
दिल्ली सरकार के सूत्र बताते हैं कि दिल्ली में सात संसदीय क्षेत्र हैं। प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में दस विधायक हैं। प्रत्येक विधानसभा में चार वार्ड या पार्षद हैं। दिल्ली सरकार जिस स्वराज कानून पर काम कर रही है, उसके मुताबिक प्रत्येक वार्ड में 10 मोहल्ला सभा होंगी।
विशेष बात यह है कि इन मोहल्ला सभा का चेयरमैन पार्षद होगा। अभी तक पार्षद बहुत छोटा नुमाइंदा होता था, जो अब 10 जन प्रतिनिधियों का हेड होगा। सूत्र बताते हैं कि स्वराज कानून को मूर्त रूप दिए जाने के बाद राज्य चुनाव आयोग मोहल्ला सभा की बाउंड्री तय करेगा। इसके बाद चुनाव कराए जाएंगे।
इसमें आधे सदस्य पुरुष व आधी महिलाएं होंगी। विधायक फंड खत्म किए जाने के कारण मोहल्ला सभा की शक्तियां बढ़ेंगी। कई योजनाएं इनकी ओर से ही तैयार कराई जाएंगी।