सोमवार को स्वच्छ भारत अभियान की तीसरी वर्षगांठ मनाई जाएगी। इस संबंध में सभी संबंधित विभाग विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। मगर एक भी विभाग ने स्वच्छ भारत अभियान की पूर्व संध्या पर यमुना नदी की सुध लेना मुनासिब नहीं समझा।
यमुना नदी के ज्यादातर घाटों की स्थिति रविवार को बदहाल दिखाई दी। घाटों पर चारों ओर मां दुर्गा की प्रतिमा, पूजा सामग्री, कूड़ा और अन्य सामान बिखरे हुए थे।
रविवार को अमर उजाला की टीम ने रविवार को यमुना नदी स्थित विभिन्न पुलों और घाटों और यमुना के ऊपर बने पुलों का निरीक्षण किया। यमुना के घाटों पर चारों ओर पूजा सामग्री, कूड़े और अन्य सामान बिखरे दिखे।
वहीं घाटों पर कहीं लकड़ी की टुकड़े तो कहीं बांस की बल्लियां पड़ी हुई थी। इसी तरह मिट्टी के टूटे बर्तन, रंगबिरंगे कागज, प्लास्टिक की थैलियां, कपड़े, शीशे का कवर चढ़े फोटो पड़े हुए थे। घाटों के किनारे बड़ी संख्या में मां दुर्गा की मूर्ति तैर रही थी।
यमुना नदी के घाटों की स्थिति उसे गंदगी से मुक्त करने के प्रयास का कड़ा झटका है। इसके अलावा प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत अभियान को प्रशासन की ओर से हल्के में लेने का प्रमाण है। इतना ही नहीं, प्रशासन पर एनजीटी के आदेश का भी दूर-दूर तक असर नहीं दिखा है।
मालूम हो कि दुर्गा पूजा संपन्न होने के बाद शनिवार को श्रद्धालुओं ने यमुना नदी के घाटों पर बड़ी संख्या में मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया था। विजर्सन के दौरान श्रद्धालु अपने साथ पूजा सामग्री भी लेकर आए थे।
इसके अलावा नवरात्र खत्म होने के बाद बड़ी तादाद में लोगों ने पूजा सामग्री यमुना नदी में डालनी शुरू कर दी है। यमुना नदी के घाटों और यमुना के ऊपर बने पुलों पर पूजा सामग्री के ढेर लगे हैं।