इलेक्ट्रॉनिक गैजट्स ने न सिर्फ बड़ों बल्कि स्कूली बच्चों की भी नींद उड़ा रखी है। देर रात मोबाइल और इंटरनेट पर चैटिंग करने, रात में उठ कर बार-बार मोबाइल चेक करने की वजह से करीब 50 फीसदी बच्चों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है।
इस वजह से स्कूल में उन्हें नींद आती है। फोर्टिस हेल्थकेयर की ओर से दिल्ली-एनसीआर में 550 स्कूली बच्चों पर किए गए सर्वे रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। दिल्ली-एनसीआर में किए गए सर्वे में सामने आया है कि करीब 33 फीसदी स्कूली बच्चे रात 11 बजे बिस्तर पर जाते हैं और करीब 15 फीसदी बच्चे मध्य रात्रि में सोने जाते हैं।
20 फीसदी बच्चे ऐसे हैं जिनके सोने का कोई समय ही निर्धारित नहीं है। 34 फीसदी स्कूली बच्चों ने कहा कि रात की नींद पूरी नहीं होने की वजह से उन्हें स्कूल में नींद आती है। 29 फीसदी बच्चों ने कहा कई बार वे रात में पांच घंटे से भी कम सोते हैं, जबकि 13 फीसदी ने कहा कि वे अक्सर पांच घंटे से कम सोते हैं।