दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने के लिए जनमत संग्रह की तैयारी कर रही दिल्ली सरकार को सी-वोटर के एक सर्वे से संजीवनी मिली है। सर्वे के मुताबिक,81 फीसदी दिल्लीवासी पूर्ण राज्य के पक्ष में हैं।
जबकि 19 फीसदी लोग इसके विरोध में हैं। खास बात यह कि सर्वे में करीब 62 फीसदी भाजपा समर्थकों ने भी दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिए जाने की बात कही है।
अलग-अलग जातियों, समुदायों, वर्गों के करीब तीन हजार लोगों पर किए गए सर्वे में से 80 फीसदी का मानना है कि इस मसले पर जनमत संग्रह जायज है।
वहीं,20 फीसदी लोगों ने जनमत संग्रह का विरोध किया है। वहीं जनमत संग्रह होने की हालत में 81 फीसदी लोगों का मानना है कि दिल्ली का पूर्ण राज्य का दर्जा मिलना चाहिए।
92 फीसदी महिलाएं है पक्ष में
खास बात यह कि आम आदमी पार्टी के 93 फीसदी समर्थक और 62 फीसदी भाजपा समर्थकों ने भी पूर्ण राज्य के दर्जे से सहमति जताई है। वहीं, 92 फीसदी महिलाएं और 73 फीसदी पुरुष चाहते हैं कि दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले।
दूसरी तरफ पूर्ण राज्य मिलने के बाद प्रदेश सरकार की तरफ से बेहतर शासन और कानून व्यवस्था को लेकर लोगों की राय बंटी हुई है। 46 फीसदी को उम्मीद है कि पूर्ण राज्य मिलने पर सकारात्मक बदलाव आएगा।
वहीं, 26 फीसदी लोगों को ज्यादा बदलाव की उम्मीद नहीं है। जबकि 28 फीसदी का मानना है कि इससे राज्य में कोई बदलाव नहीं होने वाला है।
‘आप’ के साथ दिल्ली होगी बेहतर
सर्वे के मुताबिक दिल्लीवासियों का भरोसा अभी भी आम आदमी पार्टी के साथ बना हुआ है। सर्वे में 48 फीसदी लोगों का मानना है कि ‘आप’ सरकार दिल्ली के बेहतरी के काम कर सकती है।
जबकि 30 फीसदी लोग केंद्र सरकार के साथ दिखे। करीब 63 फीसदी ‘आप’ समर्थकों ने माना कि मौजूदा सरकार को दिल्ली की सभी समस्याओं का समाधान कर सकती है। इस मामले में भाजपा समर्थकों का प्रतिशत 33 है।
सर्वे में लोगों ने माना कि जनमत संग्रह के नाम पर राज्य सरकार मौजूदा विवादों से दिल्लीवासियों का ध्यान भटकाना चाहती है। 59 फीसदी लोग इससे सहमत हैं।
वहीं, 41 फीसदी ने इससे असहमति जताई है। वहीं, 22 फीसदी लोगों का मानना है कि केंद्र व प्रदेश सरकार की जंग के बीच बेवजह समय का नुकसान हो रहा है।