फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'भगवान' का चमत्कार: तीन माह के बच्चे की एक साथ हुई दोनों किडनी की सर्जरी, मेडिकल हिस्ट्री में सबसे छोटा बच्चा

Sun, 21 May 2023 05:38 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बच्चे को पेशाब करने में दिक्कत हो रही थी, जो आगे चलकर दोनों किडनी को खराब कर सकता था। इससे बच्चे की मौत भी हो सकती थी। ऐसे में सर्जरी ही एक विकल्प था।
विज्ञापन
तीन महीने के बच्चे की एक साथ हुई दोनों किडनी की सर्जरी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली के वसंत कुंज निवासी तीन माह के बच्चे के पेट में गांठ दिखने के बाद एम्स के डॉक्टरों ने जांच के लिए अल्ट्रासाउंड किया, तो पाया बच्चा जन्म से गुर्दे में सूजन से परेशान है। बच्चे को पेशाब करने में दिक्कत हो रही है, जो आगे चलकर दोनों किडनी को खराब कर सकता है। इससे बच्चे की मौत भी हो सकती है। ऐसे में सर्जरी ही एक विकल्प था, लेकिन बच्चे की उम्र काफी छोटी थी। मेडिकल हिस्ट्री में यह सबसे छोटा बच्चा है जिसमें एक साथ दोनों किडनी की सर्जरी करनी थी।

विज्ञापन

एम्स के बाल चिकित्सा सर्जरी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. विशेष जैन ने बताया कि तीन माह के बच्चे की किडनी की सर्जरी के लिए विभाग प्रमुख प्रोफेसर मीनू वाजपेयी के नेतृत्व में द्विपक्षीय लेप्रोस्कोपिक पाइलोप्लास्टी सर्जरी करने का विकल्प को चुना गया। इसके लिए बच्चे के नाभी के पास तीन एमएम के होल करके कैमरा व अन्य सर्जरी उपकरण को शरीर में डाला गया और एक-एक करके दोनों किडनी की सर्जरी की गई। इस प्रक्रिया से गुजरने वाला यह बच्चा दुनिया में सबसे कम उम्र का रोगी है। सर्जिकल टीम ने सूक्ष्म टांके और सूक्ष्म उपकरणों का उपयोग करके पेशाब की रुकी हुई नली (यूरेरोपेल्विक जंक्शन) का सावधानी से पुनर्निर्माण किया।

करीब सवा दो घंटे चली सर्जरी के बाद बच्चे में तेजी से रिकवरी हुई और उसे तीन दिनों के भीतर ही छुट्टी दे दी गई। डॉ. जैन ने कहा कि सर्जरी के करीब चार माह बाद जब बच्चे की फिर से फॉलोअप के लिए बुलाया गया तो जांच में पाया गया कि उसकी दोनों किडनी बेहतर ढंग से काम कर रही है। बच्चा अब सात माह का हो चुका है और भविष्य में किडनी का रोग होने की उम्मीद नहीं दिख रही।

क्या है लैप्रोस्कोपिक
लैप्रोस्कोपिक पाइलोप्लास्टी प्रक्रिया एक न्यूनतम इनवेसिव सर्जिकल तकनीक है। इसका उपयोग यूरेरोपेल्विक जंक्शन रुकावट (यूपीजेओ) के इलाज के लिए किया जाता है। इस स्थिति में जन्म से बच्चे मूत्र पथ बाधित होता है और गुर्दे से मूत्राशय तक मूत्र के प्रवाह में दिक्कत आती है। इस केस में बच्चे के दोनों दोनों किडनी में रुकावट थी।
विज्ञापन

शरीर से गए सर्जरी के निशान
डॉ. विशेष जैन ने कहा कि सर्जरी के कुछ महीनों बाद बच्चे को फॉलोअप के लिए बुलाया गया। इस दौरान जांच में कॉस्मेटिक परिणाम उत्कृष्ट पाए गए। सर्जरी के करीब तीन माह बाद निशान नहीं दिख रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस सर्जरी की सफलता ने भविष्य में सर्जरी की आवश्यकता को खत्म कर दिया है। लैप्रोस्कोपिक विकल्प के तौर पर सामने आया है। कम उम्र में यूपीजेओ की स्थिति से समस्या को दूर किया जा सकता है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें