फरीदाबाद। कला किसी की मोहताज नहीं होती। यही कारण है कि चीज को आकार देने मे सांचे और ढांचे की जरूरत नहीं पड़ती। यही कलाकारी करते हैं पलवल जिले के गांव औरंगाबाद निवासी राजेद्र सिंह।
शिल्पकार राजेंद्र ग्लास आइटम बनाते हैं। अपनी इसी कला के बदौलत वर्ष 2002-03 में उन्हें स्टेट अवार्ड से नवाजा जा चुका है।
राजेंद्र सिंह अब तक ग्लास को गलाकर बगैर किसी सांचे व ढांचे के कई देवी-देवताओं की मूर्तियां बना चुके हैं। गणेश, राधाकृष्ण, साईं बाबा, शिवलिंग सहित अनेक प्रकार के जंगली जानवरों के आकर्षक आइटम बना चुके हैं।
सबसे अधिक मांग गण्ेश मूर्ति की है। उन्होंने बताया कि 12वीं तक की पढ़ाई करने के बाद ही वह 1994 से इस कारोबार में जुट गए।
पहले अपने रिश्तेदारों के यहां जाकर ग्लास को गलाकर मूर्ति को आकार देने की कला सीखी। उसके बाद खुद गांव में ही शिल्पकारी करने लगे।
मेक इन इंडिया के पक्षधर राजेंद्र सिंह ने बताया कि नाबार्ड के सहयोग से वह इस कारोबार में जुटे हैं और गांव में ही 8-10 ग्रामीणों को रोजगार से जोड़ा है।