याचिकाकर्ता का कहना है कि सीबीएसई और आईसीएससी बोर्ड से संबंधित स्कूलों को पहले ही राज्य सरकार शिक्षकों की योग्यता और फीस तय करने के बारे में अनापत्ति प्रमाणपत्र दे चुकी है।
प्रस्ताव पास हुआ था कि निजी स्कूल हर साल 7-8 फीसदी से ज्यादा फीस नहीं बढ़ा सकते। इसके साथ ही 12वीं तक एक ही बार एडमिशन फीस ली जा सकेगी।
यह भी फैसला किया गया था कि वाहन, होस्टल, भ्रमण और कैंटीन की वैकल्पिक सुविधा लेने पर ही शुल्क देना होगा। हर तरह के शुल्क की रसीद देना स्कूलों के लिए अनिवार्य होगा।