दिल्ली सरकार ने फैसले को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी। सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने विस्तृत सुनवाई के बाद 6 दिसंबर 2017 को फैसला सुरक्षित रख लिया था। अब करीब छह माह बाद बुधवार को फैसला आएगा।
फैसला कुछ भी हो, लेकिन उससे दिल्ली सरकार का भविष्य तय होगा। सर्वोच्च न्यायालय ने यदि हाईकोर्ट के फैसले पर मुहर लगा दी तो तय है कि उपराज्यपाल और ज्यादा शक्तिशाली हो जाएंगे व दिल्ली सरकार को अधिकांश मामलों में उनकी अनुमति लेनी होगी। सरकार के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं रह जाएगा। वहीं, यदि फैसला दिल्ली सरकार के हक में आया तो दिल्ली सरकार आक्रामक रूप लेकर केंद्र के अलावा उपराज्यपाल को भी कटघरे में खड़ा करेगी।
इतना ही नहीं दिल्ली सरकार दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलवाने के अलावा अन्य मामलों में भी अपने अभियान तेज कर सकती है। कानून विशेषज्ञों के अनुसार, संभवत: सर्वोच्च न्यायालय कुछ मुद्दों पर हाईकोर्ट के फैसले को बदल भी सकती है। ऐसे में उपराज्यपाल व दिल्ली सरकार दोनों के लिए कुछ राहत भरा निर्णय हो सकता है।