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NewsClick: न्यूजक्लिक के संपादक को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने में जल्दबाजी पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल

Wed, 01 May 2024 07:34 AM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पोर्टल न्यूजक्लिक के संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को गिरफ्तारी के बाद उनके वकील को सूचित किए बिना मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने में जल्दबाजी के लिए दिल्ली पुलिस से सवाल किया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : istock
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पोर्टल न्यूजक्लिक के संपादक प्रबीर पुरकायस्थ को गिरफ्तारी के बाद उनके वकील को सूचित किए बिना मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने में जल्दबाजी के लिए दिल्ली पुलिस से सवाल किया। जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस तथ्य पर भी आश्चर्य व्यक्त किया कि पुरकायस्थ के वकील को रिमांड आवेदन दिए जाने से पहले ही रिमांड आदेश पारित कर दिया गया था।

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गिरफ्तारी के तरीके पर सवालों की झड़ी लगाते हुए पीठ ने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम 1967 के तहत एक मामले में उनकी गिरफ्तारी और रिमांड को चुनौती देने वाली पुरकायस्थ की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया। पोर्टल के माध्यम से राष्ट्र-विरोधी प्रचार को बढ़ावा देने के लिए कथित चीनी फंडिंग के मामले में अक्टूबर को गिरफ्तारी के बाद से पुरकायस्थ हिरासत में हैं।

सुनवाई के दौरान पुरकायस्थ की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि उन्हें 3 अक्टूबर, 2023 की शाम को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें अगले दिन सुबह 6 बजे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया था। सिब्बल ने अदालत को बताया कि अतिरिक्त लोक अभियोजक के साथ लीगल एड वकील ही मौजूद थे। पुरकायस्थ के वकील को सूचित नहीं किया गया था। जब पुरकायस्थ ने इस पर आपत्ति जताई तो जांच अधिकारी ने उनके वकील को टेलीफोन के माध्यम से सूचित किया और रिमांड आवेदन वकील को व्हाट्सएप पर भेजा गया। पीठ ने एएसजी एसवी राजू से पूछ, ‘पुरकायस्थ के वकील को सूचित क्यों नहीं किया गया। सुबह 6 बजे उसे पेश करने की जल्दबाजी क्या थी जबकि उन्हें पिछले दिन शाम 5.45 बजे गिरफ्तार किया गया था.आपके पास पूरा दिन था।’

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पीठ ने कहा कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के लिए आवश्यक है कि रिमांड आदेश पारित होने पर पुरकायस्थ का वकील उपस्थित रहे। एएसजी राजू ने पीठ को तर्क देकर समझाने की कोशिश की लेकिन पीठ ने इस तर्क को मानने से इनकार कर दिया। लंबी बहस के बाद आखिरकार पीठ ने इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। पीठ पुरकायस्थ की विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिसमें दिल्ली पुलिस द्वारा उनकी गिरफ्तारी को बरकरार रखने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाया गया था। सह-अभियुक्त और प्रमुख अमित चक्रवर्ती ने भी अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था लेकिन ईडी के सरकारी गवाह बनने के बाद उन्हें अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति दी गई।

पुरकायस्थ के खिलाफ दाखिल आरोप पत्र पर अदालत का संज्ञान 
अदालत ने समाचार पोर्टल न्यूजक्लिक एवं उसके संस्थापक व प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ आतंकवाद रोधी कानून गैरकानूनी गतिविधियां निवारण अधिनियम (यूएपीए) के तहत दाखिल आरोपपत्र पर संज्ञान ले लिया। पटियाला हाउस कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश हरदीप कौर ने कहा कि आरोपी के खिलाफ संज्ञान लेने के लिए पर्याप्त सबूत हैं। उन्होंने अभियोजन पक्ष को आरोपपत्र की एक प्रति पुरकायस्थ को देने का निर्देश दिया। साथ ही आरोप तय करने पर बहस के लिए सुनवाई 31 मई के लिए स्थगित कर दी। दिल्ली पुलिस ने 30 मार्च को समाचार पोर्टल न्यूज़क्लिक एवं उसके संस्थापकों के खिलाफ यूएपीए के तहत लगभग आठ हजार से अधिक पन्नों का आरोप-पत्र दाखिल कर दिया था।
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