सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐसा निर्णय दिया है जिससे कई कैदियों के परिवारों को राहत मिलेगी। कोर्ट ने आगरा और वाराणसी की जेलों में बंद ऐसे 97 कैदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है, जो 20 साल से अधिक की सजा काट चुके हैं। लेकिन इन्हें 2018 में उत्तर प्रदेश राज्य सरकार की तरफ से बनाई गई समय से पहले रिहाई नीति के तहत योग्य होने के बावजूद रिहा नहीं किया गया। शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को इसके लिए तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने का नोटिस भी दिया है।
जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस जेके माहेश्वरी की पीठ ने यह आदेश वकील ऋषि मल्होत्रा के माध्यम से दाखिल दो याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया। याचिकाओं में कहा गया था कि 2018 की नीति के तहत योग्य होने के बावजूद इन कैदियों को रिहा नहीं करना इन्हें ‘अवैध हिरासत’ में रखने जैसा है।
इस पर पीठ ने अपने आदेश में इन कैदियों को अंतरिम जमानत पर रिहा करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया। पीठ ने कहा कि ये याचिकाकर्ता 20 साल से अधिक समय जेल में काट चुके हैं, इसलिए उन्हें अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाता है। इन कैदियों की अंतरिम जमानत की शर्तें निचली अदालत की तरफ से तय की जांएगी।
2021 में नीति में संशोधन को भी दी गई है चुनौती
याचिकाकर्ताओं ने याचिका में कहा कि संविधान के अनुच्छेद-161 के तहत राज्य सरकार की 2018 की नीति के अनुसार दोनों याचिकाकर्ता रिहा होने के हकदार हैं। लेकिन राज्य सरकार ने उन जैसे कैदियों के अधिकारों को छीनने के लिए जुलाई 2021 में 2018 की नीति को संशोधित कर दिया। उन्होंने इस संशोधन को गलत बताते हुए इसे भी चुनौती दी है।