सुप्रीम कोर्ट ने एसोटेक बिल्डर और जीडीए को अवमानना का नोटिस भेजा है। बिल्डर और जीडीए पर आरोप है कि मई 2011 में विंडसर पार्क सोसायटी में अतिरिक्त निर्माण की कंपाउंडिंग पर रोक के बावजूद धड़ल्ले से निर्माण किया गया।
इतना ही नहीं जीडीए ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद कंपाउंडिंग भी की। उधर, बिल्डर ने सुप्रीम कोर्ट अवमानना से इंकार किया है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के समक्ष समस्त दस्तावेज प्रस्तुत किए जाएंगे।
विंडसर पार्क आरडब्ल्यूए ने बिल्डर के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) दायर की थी, जिसमें वर्ष 2008 के बाद सोसायटी में हुए अवैध निर्माणों की कंपाउंडिंग और सोसायटी आरडब्ल्यूए को हैंडओवर नहीं करने पर चुनौती दी गई थी।
गत 12 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई में अंतरिम आदेश पारिया किया। जिसमें कहा गया कि याचिका लंबित रहने के दौरान जीडीए अतिरिक्त निर्माणों की कंपाडिंग नहीं करेगा।
आरडब्ल्यूए ने आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद एसोटेक बिल्डर ने निर्माण जारी रखा। जीडीए की ओर से कंप्लीशन सर्टिफिकेट भी निर्गत कर दिया गया।
आवासीय भूखंड में बेकरी की दुकान, रेस्टोरेंट, बैंक और मैरिज हॉल का निर्माण हुआ। आरडब्ल्यूए का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद जीडीए ने इनकी सीलिंग नहीं की।
उधर, एसोटेक के एमडी नीरज गुलाटी ने कहा कि वर्ष 2008 में फ्लैट रेजीडेंट्स को हैंडओवर कर दिए गए थे। उनकी ओर से इसके बाद कोई भी निर्माण नहीं किया गया है। इस संबंध में समस्या दस्तावेज हैं, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत किया जाएगा।
जीडीए वीसी संतोष यादव ने कहा कि अभी सुप्रीम कोर्ट के नोटिस की जानकारी नहीं है। कोर्ट ने कोई नोटिस दिया है तो उसके अनुरूप प्राधिकरण कोर्ट में अपना पक्ष रखेगा।