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तिहाड़ में फोन और कंप्यूटर भी इस्तेमाल करेंगे सहारा

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सुप्रीम कोर्ट ने पिछले पांच महीने से तिहाड़ जेल में बंद सहारा समूह के मुखिया सुब्रत राय को बैरक से बाहर आने और जेल परिसर के सम्मेलन कक्ष के इस्तेमाल की बुधवार को अनुमति दे दी।
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ताकि वह दस हजार करोड़ रूपए की व्यवस्था करने के सिलसिले में न्यूयार्क और लंदन स्थित अपने आलीशान होटल के संभावित खरीदारों से सौदा कर सकें।

जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने 65 वर्षीय राय से कहा कि विदेश से खरीदारों से संपर्क साधने के लिये आवश्यक फोन और कम्प्यूटर जैसे उपकरणों का विवरण दें।

सुब्रत रॉय को मिलेगी हर सुविधा

पीठ इस मामले में एक अगस्त को आदेश जारी करेगी, लेकिन इससे पहले राय को उन चीजों का विवरण देना होगा, जिनकी उन्हें बातचीत के लिये आवश्यकता है।

इससे पहले दिल्ली सरकार ने सुझाव दिया है कि राय जेल परिसर में स्थित सम्मेलन कक्ष या अतिथि गृह से विचार विमर्श कर सकते हैं। लेकिन इसके लिये लोगों को सुबह छह बजे से शाम आठ बजे के दौरान ही जेल में आना होगा। इस काम के लिये इंटरनेट कनेक्शन भी उपलब्ध कराया जायेगा।

शीषस्थ अदालत ने 25 जुलाई को दिल्ली सरकार से कहा था कि तिहाड़ जेल परिसर में ही ऐसे स्थान की संभावना तलाशी जाये। जहां सुब्रत राय खरीदारों के साथ बातचीत कर सकें।

संपत्ति बेचने के लिए सहारा ने की ये मांग

राय ने कहा था कि वह शीर्ष अदालत के निर्देश का पालन करने के लिये कृतसंकल्प हैं। वह चाहते थे कि उन्हें एक सप्ताह के लिये तिहाड़ जेल के अतिथि गृह में स्थानांतरित कर दिया जाये ताकि वे नियमित जमानत हेतु दस हजार करोड़ रूपए का व्यवस्था करने के इरादे से देश और विदेश में अपनी संपत्तियां बेचने के लिये बातचीत कर सकें।

सर्वोच्च अदालत ने इससे पहले सुब्रत राय को अंतरिम जमानत या पेरोल पर रिहा करने से इंकार कर दिया था। लेकिन उन्हें दस हजार करोड़ रूपए की व्यवस्था करने के लिये अपने आलीशान होटल बेचने की अनुमति दे दी थी।

अदालत ने इस मामले में मदद के लिये वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफाड़े को न्याय मित्र नियुक्त किया है। इस मामले में सहारा समूह को शीर्षस्थ अदालत में कार्यवाही के निपटारा पाने के लिए करीब 37 हजार करोड़ रूपए का भुगतान करना पड़ सकता है।
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सेबी के पास जमा कराई है रकम

गौरतलब है कि राय को निवेशकों की बीस हजार करोड़ रूपए से अधिक की रकम नहीं लौटाने के कारण चार मार्च को तिहाड़ जेल भेज दिया गया था।

अदालत ने राय से कहा था कि नियमित जमानत के लिये उन्हें दस हजार करोड़ रूपए का भुगतान करना होगा जिसमे से पांच हजार करोड़ रूपए नगद और इतनी ही राशि की बैंक गारंटी देनी होगी।

सहारा अभी तक 3117 करोड़ रूपए की ही व्यवस्था कर सका है। यह रकम सेबी के पास जमा करायी जा चुकी है। जबकि सहारा समूह का दावा है कि वह 93 फीसदी निवेशकों का धन पहले ही लौटा चुका है।
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