पिछले कुछ दिनों से गर्मी के कारण परिंदे अस्वस्थ होने के साथ-साथ अपनी जान भी गंवा रहे हैं।
पक्षी प्रेमी और उन्हें पालने वाले इससे काफी व्यथित हैं। चिकनपॉक्स और पैरालाइसिस जैसी नए ट्रेंड की बीमारियां पक्षियों को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रही हैं।
जब से गर्मी की धार तेज हुई है, तब से पक्षियों का स्वास्थ्य खराब होने लगा है। तीन दिनों से बड़ी संख्या में पक्षियों के मरने का सिलसिला जारी है। सोहना, पटौदी, फर्रूखनगर और गुड़गांव क्षेत्र में काफी संख्या में पक्षी बीमार हो रहे हैं।
पक्षियों के बारे में जानकारी रखने वाले डॉ. अशोक दिवाकर कहते हैं कि जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक होता है तो दिक्कत बढ़ जाती है।
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गुड़गांव में प्रदूषण, जंगलों का कटना, अरावली का खनन, झीलों का अस्तित्व खत्म होना और खेती के दायरे का घटना भी पक्षियों के जीवन को लील रहा है।
गर्मी के कारण चारे की खोज में बाहर निकलने वाले पक्षियों को हीटस्ट्रोक हो रहा है। जिससे वह जान गंवा रहे हैं। घर में पक्षी पालने वाले सुरंजन शर्मा का कहना है कि गर्मी में उन्हें बचा कर रखना बड़ी चुनौती होती है।
उनके पास कॉकोटेल पक्षी है। दो दिन पहले उसे पोराइजा की शिकायत हो गई थी। अब वह ठीक है।
निगम का प्रयास
नगर निगम आयुक्त डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि नगर निगम ने शहर में पक्षियों के लिए पानी के स्त्रोत बनाएं जा रहे हैं। साथ ही उनके लिए दाना-चूगा की व्यवस्था की जा रही है। नए और पुराने शहर से लेकर अरावली तक ऐसी व्यवस्था की जा रही है। आयुक्त ने शहर वासियों से अपील की है कि छतों पर पक्षियों के लिए पानी का बंदोबस्त करें।
गर्मी में पक्षियों को होने वाली बीमारियां
-पोराइजा (आंखों से दिखना बंद हो जाता है जिसके वह पेड या दीवारों से टकरा जाते हैं)
-पैरालाइसिस (शरीर बेदम हो जाता है)
-चिकनपॉक्स (छोटे उम्र के पक्षियों में)
-हीटस्ट्रोक (लू)
-डायरिया
-डी हाइड्रेशन
-मुंह आना