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हाईस्पीड ट्रेनों के लिए खर्च किए 25 करोड़, टेल्गो ने बनाया रफ्तार का रिकॉर्ड

Sun, 24 Jul 2016 01:18 AM IST
भोला पांडेय/अमर उजाला, फरीदाबाद
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TELGO TRAIN - फोटो : अमर उजाला
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इस सेक्शन में हाई स्पीड ट्रेनों को दौड़ाने के लिए ट्रैक दुरुस्त करने पर 25 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है। निजामुद्दीन से आगरा के बीच 187 किलोमीटर के ट्रैक को हाई स्पीड ट्रेनों के लिए तैयार किया गया है। 
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यही कारण है कि मथुरा से पलवल के बीच स्पेनिश ट्रेन का 180 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से ट्रायल सफल रहा है। इस ट्रैक की फिटनेस 160 किलोमीटर प्रतिघंटे की है, लेकिन ट्रायल के लिए 180 की रफ्तार की मंजूरी मिली है। आने वाले दिनों में उक्त ट्रैक पर 200 किलोमीटर की रफ्तार से गाड़ियां दौड़ती नजर आएंगी।

रेल अधिकारियों का कहना है कि इस ट्रैक पर अभी तक देश की सबसे तेज दौड़ने वाली गाड़ियों में शुमार गतिमान एक्सप्रेस अपनी अधिकतम स्पीड 160 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से लगातार दौड़ रही है।
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लेकिन बृहस्पतिवार को मथुरा से पलवल के बीच स्पेनिश ट्रेन टेल्गो को 180 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ाकर रेलवे ने नया रिकॉर्ड बना दिया है। रेल अधिकारियों के मुताबिक, इस ट्रैक को 200 किमी प्रति घंटे से भी ज्यादा रफ्तार से दौड़ने वाली ट्रेनों के अनुकूल बनाया गया है।

इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम का होगा ट्रायल
रेलवे के एक अधिकारी का कहना है कि टेल्गो का 180 की रफ्तार से ट्रायल सफल रहा है। इसके परिचालन मे जो डाटा एकत्र किए गए हैं उनका बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है। 

अधिकारी ने बताया कि टेल्गो का रैक आगरा पहुंच चुका है। उनके कोच के पहियों में कुछ तकनीकी परिवर्तन करके अब इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम का ट्रायल किया जाएगा।
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डीजल इंजन दौड़ा रहा है 180 की स्पीड

High speed Telgo train 4 - फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
डीजल इंजन दौड़ा रहा है 180 की स्पीड
रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि रिसर्च डिजाइंस एंड स्टैंडर्स आर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) के मुताबिक, डीजल इंजन को दौड़ाने की क्षमता 150 किलोमीटर प्रतिघंटा निर्धारित की गई है, लेकिन अधिकतम 180 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से दौड़ाने की आरडीएसओ की ओर से मंजूरी है। उन्होंने बताया कि अगस्त के प्रथम सप्ताह में दिल्ली-मुंबई ट्रैक पर प्रस्तावित टेल्गो का ट्रायल डीजल और इलेक्ट्रिक इंजन दोनों से किया जाएगा।

टेल्गो कोच की प्रमुख खासियत
-भारतीय कोच में दो पहिये एक ही धुरी पर होते हैं, जिससे जर्क पूरे कोच पर आता है। टेल्गो के कोच में पहिये अलग-अलग धुरी से जुड़े होते हैं। इससे कोच में जर्क महसूस नहीं होता।
-कोच एल्युमीनियम से बने होने के कारण बेहद हल्के हैं। इससे रफ्तार तेज है। इसकी सीट भी बेहद आरामदायक है।
-बुजुर्गों, प्रेगनेंट महिलाओं और बच्चों को प्लेटफॉर्म पर उतरने में भी परेशानी नहीं होगी।
-इमरजेंसी ब्रेक लगने पर यात्रियों को जर्क (झटका) नहीं लगेगा।

देश में क्या है ट्रेनों की स्पीड
-गतिमान एक्सप्रेस : 160 किमी प्रतिघंटा
-भोपाल शताब्दी दिल्ली-आगरा  : 150 किमी प्रतिघंटा
-राजधानी एक्सप्रेस : 140 किमी प्रतिघंटा
-एक्सप्रेस सुपरफास्ट ट्रेनें : 90 किमी प्रतिघंटा
-पैसेंजर ट्रेन : 60 किमी प्रतिघंटा

टेल्गो का ट्रायल 31 जुलाई तक चलेगा। अब उसका इमरजेंसी ब्रेकिंग सिस्टम का ट्रायल होना है। कोच के पहियों में तकनीकी सुधार किया जा रहा है। अब तक हुए ट्रायल प्राथमिक आधार पर सफल रहे हैं। 
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