सरकारी अस्पताल में कदम रखते ही आपकी रूह कांप उठेगी। सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि पता नहीं सही इलाज होगा भी या नहीं। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के लिए करोड़ों खर्च कर रही है। मरीजों को कई सुविधाएं फ्री में मिलने लगी हैं। लेकिन फिर भी सरकारी अस्पताल में मरीजों को सही इलाज नहीं मिलता है।
पर्ची के लिए लंबी लाइन, ओपीडी में चिकित्सक का इंतजार, दवाओं का उपलब्ध न होना, किसी भी बीमारी का आधा इलाज होना, जरा सी इमरजेंसी में दूसरे अस्पताल के रेफर करना यही जनपद के मरीजों की नियति है।
इनके अलावा सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है। सरकारी अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट, स्किन स्पेशलिस्ट, ईएनटी स्पेशलिस्ट, हार्ट स्पेशलिस्ट, सहित अन्य कई बीमारियों के इलाज के लिए विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं हैं।
गंभीर बीमारियों का इलाज नहीं
दिल, गुर्दे, कैंसर जैसी बीमारियों का इलाज इन अस्पतालों में नहीं होता है। ट्रॉमा सेंटर सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। गंभीर एक्सीडेंट वाले मरीज तो सरकारी अस्पताल का रुख न ही करें तो बेहतर है। बर्न वार्ड की इमारत खड़ी है मगर स्टाफ नहीं है।