एम्स में मानव अंग प्रत्यारोपण अधिनियम बनने की 25वीं वर्षगांठ के मौके पर शनिवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस मौके पर डॉक्टरों और अंगदान करने वाले मरीजों ने अपने अनुभव साझा किए।
इस दौरान उत्तराखंड स्थित बागेश्वर जिला निवासी प्रेम सिंह ने बताया कि इसी साल जून में दुर्घटना में उनके बेटे की जान चली गई थी। उन्होंने बेटे के अंग दान कर चार लोगों की जिंदगी बचा ली।
प्रेम सिंह ने बताया कि इसी साल अप्रैल में उनकी पत्नी की तबीयत खराब हो गई थी और उनका बेटा उन्हें फोन कर रहा था। घर में नेटवर्क नहीं आने के कारण वह बाहर जाकर घर के पास वाले पहाड़ पर चढ़कर उन्हें कॉल कर रहा था।
इस दौरान उसका पैर फिसल गया था और वह 30 फुट ऊंचाई से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। उसे हल्द्वानी स्थित अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से उसे एम्स रेफर कर दिया गया था। घटना में उनके बेटे का ब्रेन डेड हो गया था। इसके बाद उन्होंने उसके अंग दान करने का निर्णय लिया।
डॉक्टरों ने भी उन्हें अंगदान के लिए प्रेरित किया और उन्होंने अपने बेटे का दिल, लिवर और दोनों किडनियां दान कर दी। इससे चार लोगों की जान बच सकीं।
एम्स की डॉक्टर आरती विज ने बताया कि उनके अस्पताल में सभी संभावित ब्रेन डेड के परिजनों को अंगदान के लिए प्रेरित किया जाता है। उनकी हेल्पलाइन सेवा पर कोई भी अंगदान करने या अंगदान की प्रतिज्ञा लेने के लिए संपर्क कर सकता है।