राष्ट्रीय तम्बाकू मुक्ति सेवा के आंकड़े बताते हैं कि यहां आए कॉल में सबसे ज्यादा सेवन करने वालों में 10वीं पास के छात्र पाए गए हैं। यही कारण है कि डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में आ रहे मरीजों में धूम्रपान करने वालों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है। हालांकि पूछताछ में अधिकतर मरीज साफ मना कर देते हैं, लेकिन उपचार के दौरान जब रोग के ठीक होने में देरी होती है या समस्या बढ़ जाती है तो इसका पता चलता है।
इस बारे में विभाग के सलाहकार डॉ. ओपी मीणा ने कहा कि धूम्रपान करने वाले मरीजों में बेहतर तरीके से ऑपरेशन करने के बाद भी हड्डी जुड़ने में काफी समय लगता है। कई बार समस्या बढ़ जाती है। उन्होंने कहा क धूम्रपान के कारण हड्डी की गुणवत्ता खराब होती है, ठीक होने का समय बढ़ जाता है। इसके अलावा अन्य समस्याएं भी बढ़ जाती है। यहीं कारण है मरीजों को पूरी तरह से धूम्रपान छोड़ने को कहा जाता है। लेकिन देखा गया है कि अधिकतर लोग छोड़ते ही नहीं हैं।
अस्पताल में 20 फीसदी तक मामले
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के हड्डी रोग विभाग में धूम्रपान करने वाले 15 से 20 फीसदी मामले आते हैं। इनकी संख्या तेजी से बढ़ रही है। विभाग की ओपीडी में रोजाना 500-600 मरीज आते हैं। इनमें से 100 से 150 मरीज फैक्चर से जुड़े होते हैं। इन मरीजों में जो चैन स्मोकर होते हैं, या अत्याधिक धूम्रपान करते हैं उनकी समस्या काफी गंभीर हो जाती है।
नहीं करते हैं स्वीकार
डॉक्टरों का कहना है कि विभाग में आने वाले लगभग सभी युवा वयस्क से धूम्रपान करने की जानकारी ली जाती है। इनमें से अधिकतर लोग धूम्रपान करने के बावजूद मना कर देते हैं। जबकि जांच में पता चल जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि सामाजिक ताने बाने में देखा गया है कि धूम्रपान एक आदत बनती जा रही है, साख कर युवाओं में। वहीं बड़ी संख्या में बुजुर्ग भी इससे पीड़ित हैं।
शरीर का रखें ध्यान
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय शुक्ला का कहना है कि हमने 9वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया है। इसका उद्देश्य ही शरीर को स्वस्थ रखना है। धूम्रपान व तंबाकू का सेवन शरीर को नुकसान पहुंचाता है। इसके सेवन से बचना चाहिए।
क्या होता है नुकसान
- धूम्रपान कैल्सीटोनिक हार्मोन को बाधित करता है, जो हड्डियों का निर्माण करता है।
- धूम्रपान हार्मोन कोर्टिसोल को बढ़ाता है, जिससे हड्डी टूट जाती है।
- धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है, रक्त की आपूर्ति को बाधित करता है जिससे फ्रैक्चर होता है।
- निकोटिन और फ्री रेडिकल्स हड्डियों को बनाने वाली ऑस्टियोब्लास्ट कोशिकाओं को मारते हैं।