ध्रूमपान बहुत ही हानिकारक है। सिगरेट पीने से सिर्फ दिल और फेफड़ों को ही नुकसान नहीं पहुंचता, बल्कि इसका असर शुक्राणुओं पर भी पड़ता है। यही कारण है कि यह इनफर्टिलिटी का कारण बन सकता है।
आंकड़े बताते हैं कि अकेले भारत में ही धू्रमपान करने से प्रति वर्ष 60 लाख लोगों की मौत हो जाती है। हाल ही में एक शोद्य के बाद यह बात भी सामने आई है कि 18 वर्ष से अधिक उम्र की चार में से एक महिला धू्रमपान करती है।
आईवीएफ विशेषज्ञ डा. ज्योति गुप्ता ने बताया धूम्रपान महिलाओं में इनफर्टिलिटी की संभावना को 60 प्रतिशत तक बढ़ा सकता है। धूम्रपान का एक्टोपिक गर्भावस्था से संबंध हो सकता है। इसके कारण फैलोपियन ट्यूबों में समस्या आ सकती है।
एक्टोपिक गर्भावस्था में, शुक्राणु गर्भाशय तक नहीं पहुंचते फ्लोपियन ट्यूब के अंदर प्रत्यारोपण हो जाते हैं। इसके कारण गर्भाशय में परिवर्तन आ सकता है। ऐसे में गर्भाशयकैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। सिगरेट में मौजूद रसायन अंडाशय के भीतर एंटीऑक्सीडेंट स्तर में असंतुलन पैदा कर सकते हैं।यह असंतुलन निषेचन को प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कहा तंबाकू का पुरुष प्रजनन क्षमता पर भी भारी दुष्प्रभाव पड़ता है। यह रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाकर रक्त प्रवाह को प्रभावित करता है। तंबाकू के कारण क्रोमोसोम को भी क्षति पहुंच सकती है।