प्रदूषण से निपटने के लिए नोएडा प्राधिकरण की तरफ से प्रयास किए जा रहे हैं। इसके तहत कंस्ट्रक्शन साइटों के आसपास व सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है, ताकि धूल न उड़े। दरअसल, नोएडा के कई इलाकों में चल रहे निर्माण कार्यों के चलते सड़कों पर मिट्टी जमा हो गई है। गाड़ियों की आवाजाही से धूल उड़कर हवा में घुल रही है।
नोएडा प्राधिकरण के डीसीईओ सौम्य श्रीवास्तव ने बताया कि रविवार को पानी के टैंकरों से एमपी-2, एमपी-3 सिटी सेंटर, सेक्टर-71-51 चौराहा, सेक्टर-74, 75, होशियारपुर व सेक्टर-59 में पानी का छिड़काव किया गया है, जिससे धूल को हवा में घुलने से रोका जा सके। शहर में प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए नोएडा प्राधिकरण द्वारा एयर प्यूरीफायर लगाने का काम किया जाएगा। इसके लिए एक प्रस्ताव तैयार कर तत्काल प्रभाव से काम करने के निर्देश सीईओ पीके अग्रवाल ने दिए हैं। पहले चरण में बाजार, भीड़भाड़ वाले इलाकों में प्यूरीफायर लगाने की योजना है।
पीएम-10 अब भी पांच गुना
रविवार को भी शहर स्मॉग की चादर में ढका रहा। हालांकि, पीएम-2.5 का स्तर कुछ कम हुआ है, लेकिन पीएम-10 अभी भी मानक से पांच गुना अधिक यानी 500 से ज्यादा बना हुआ है। ऐसे में हल्के व भारी कणों के आपस में मिलने से वातावरण में सघन स्मॉग बन चुका है। प्रदूषण विभाग के अनुसार, यहां पीएम 2.5 का स्तर 366 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर है जो सामान्य से करीब 4 गुना अधिक है, जबकि पीएम 10 की मात्रा अब भी 500 से अधिक है।
अज्ञात व्यक्ति की मौत, प्रदूषण बताया जा रहा कारण
सेक्टर-73 के सामुदायिक केंद्र के बाहर एक अज्ञात व्यक्ति की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि प्रदूषण के कारण उसकी मौत हुई है। हालांकि, मौत के कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद पता चलेगा। हाल ही में सेक्टर-36 में भी प्रदूषण से एक महिला की मौत हो चुकी है। थाना प्रभारी सेक्टर-49 का कहना है कि प्रथम दृष्टया जांच में शख्स की मौत का कारण प्रदूषण ही लग रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद स्थिति और भी स्पष्ट हो जाएगी। मामले की जांच की जा रही है।
अस्पतालों में सांस से संबंधित मरीजों की संख्या बढ़ी
सरकारी अस्पताल में भी आंखों व अस्थमा से संबंधित मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। वरिष्ठ परामर्श दाता डाक्टर संतराम ने बताया कि वातावरण में धूल के कण ज्यादा हैं। लिहाजा, सांस से संबंधित मरीजों को काफी दिक्कत हो रही है। प्रतिदिन करीब 5 से ज्यादा नए मरीज जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं। जिनका इलाज किया जा रहा है।