नोएडा के भंगेल में रविवार को करीब 50 बीघा अधिसूचित जमीन पर बिल्डरों के निर्माणाधीन छह प्रोजेक्टों और उनके दफ्तरों को प्राधिकरण ने सील कर दिया। वर्क सर्किल आठ के प्रोजेक्ट इंजीनियर एमसी त्यागी के नेतृत्व में प्राधिकरण की टीम ने रविवार को सीलिंग की कार्रवाई की।
प्राधिकरण की टीम सुबह करीब 11:30 बजे मौके पर पहुंच गई। वहां छह प्रोजेक्टों का निर्माण चल रहा था। एक प्रोजेक्ट में तो 50 से ज्यादा फ्लैट भी बन भी चुके हैं और तीन से चार मंजिल निर्माण हो चुका है। एक में दो मंजिल और दूसरे में एक मंजिल निर्माण हुआ था।
साथ ही बिल्डरों के दफ्तरों को भी सील कर दिया गया। दो प्रोजेक्टों में अभी बेसमेंट की खुदाई कर स्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा था। इसी जगह पर चले रहे साईं मंदिर के निर्माण को भी रुकवा दिया गया। इसी तरह भैंस बांधने का तबेला भी बना लिया गया था, जिस पर सीलिंग की मुहर लगा दी गई।
करीब एक घंटे तक यह कार्रवाई चली। प्रोजेक्ट इंजीनियर एमसी त्यागी एमसी त्यागी ने बताया कि भंगेल के खसरा नंबर 176, 177, 178, 179 व 189 की जमीन को प्राधिकरण ने कई वर्ष पहले ही अधिसूचित कर लिया है। यह जमीन सेक्टर 110 के प्लान में रोड व ग्रीन बेल्ट के रूप में दर्ज है। किसी भी अधिसूचित जमीन पर निर्माण से पूर्व प्राधिकरण से अनुमति लेनी होती है, मगर किसी ने परमीशन नहीं ली।
इस कारण 24 सितंबर को इन सभी को नोटिस भेजा गया था। उन्हें निर्माण बंद करने और जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया था। इन लोगों ने जवाब तो दिया, मगर निर्माण जारी रखा। इसलिए 4 टीएस ग्रीन, विला वेगास, रियलिटी विजन, वसुंधरा डेवलपर्स, आशी, हरि नारायण इन्फ्रा और कावेरी के खिलाफ कार्रवाई की गई।
बिल्डर बोले, आबादी में दर्ज है जमीन
बिल्डरों का कहना है कि इन खसरा नंबरों की जमीन पर प्राधिकरण से अधिग्रहण की कोई भी धारा (चार, छह व नौ) नहीं लगी है। 1991 में ये जमीन आबादी के रूप में दर्ज हो चुकी है। इस पर करीब दो माह पहले धारा 143 (गैर कृषि क्षेत्र) भी करवा ली गई है। इसलिए प्राधिकरण का नोटिस जारी करना गलत है। बिल्डरों का कहना है कि नोटिस का जवाब दिया गया था। 15 दिन का वक्त भी मांगा गया था, मगर प्राधिकरण ने वक्त न देते हुए सीलिंग की कार्रवाई की है। इस बारे में प्राधिकरण से बातचीत की जाएगी। इन लोगों ने सवाल उठाया कि करीब दो साल से निर्माण चल रहा था, अगर अवैध तो इससे पहले क्यों नहीं रोका गया।
कावेरी के बाद दूसरा प्रकरण
इलाबास स्थित कावेरी सोसायटी प्रकरण के बाद आधा दर्जन जगहों पर अधिसूचित जमीन पर फ्लैट बनाने वाले बिल्डरों को नोटिस भेजा गया था। यह दूसरा प्रकरण है, जिसमें प्राधिकरण ने सीलिंग की कार्रवाई की है। ऐसे और भी कई मामले हैं, जिनको प्राधिकरण की तरफ से नोटिस भेजा जा चुका है। उन पर सीलिंग की तलवार लटक रही है।
अब तक सामने नहीं आए खरीदार
आधा दर्जन निर्माणाधीन प्रोजेक्ट सील होने के बावजूद फिलहाल रविवार को कोई भी फ्लैट खरीदार सामने नहीं आया। इसकी एक वजह जानकारी न होना भी माना जा रहा है। चूंकि फ्लैट खरीदने वाले ज्यादातर लोग बाहर के होते हैं। जिन खरीददारों ने फ्लैट खरीदा है, उनको अब परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।