कांग्रेस में दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के उस बयान का जमकर विरोध हो रहा है, जिसमें उन्होंने भाजपा का समर्थन किया था। उन्होंने बृहस्पतिवार सुबह एक बयान में कहा था कि अगर दिल्ली में भाजपा सरकार बनाती है तो अच्छा रहेगा।
इसके बाद पार्टी में शीला का जमकर विरोध शुरू हो गया। और अब उन्हें पार्टी से निकाले जाने की बात शुरू हो गई। इस मामले में पार्टी के एक पूर्व विधायक भीष्म शर्मा ने कांग्रेस आलाकमान को एक चिट्ठी लिखकर शीला को पार्टी से निकालने की मांग की है।
उधर, दिल्ली के विधायकों ने भी एक सुर में शीला के इस बयान का विरोध किया है। मुकेश शर्मा के मुताबिक पार्टी उनके इस बयान से हैरान है। वहीं हारुन युसुफ का कहना है कि यह शीला का निजी बयान है। पार्टी उनके बयान से बिल्कुल इत्तेफाक नहीं रखती।
भाजपा ने किया शीला के बयान की तारीफ
शीला दीक्षित के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए दिल्ली भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय का कहना है कि एक नेता के तौर पर उनका बयान परिपक्व और गंभीर है। उनके मुताबिक 'शीला जी वरिष्ठ नेता हैं और संवैधानिक प्रक्रिया जानती हैं। मैं इस बयान के लिए उनकी तारीफ करता हूं।'
उधर, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने भी दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर चुप्पी तोड़ दी है। उनका कहना है कि अगर दिल्ली में सरकार बनाने में अगर कोई पार्टी भाजपा को समर्थन देती है तो सहर्ष स्वीकार किया जाएगा।
हालांकि कांग्रेसी शीला दीक्षित के इस बयान से खुश नहीं है। दिल्ली कांग्रेस नेता मुकेश शर्मा ने कहा, 'शीला जी का बयान सुनकर हम हैरान हैं, हमें लगता है कि ये उनका अपना मत है। इस मामले में कांग्रेस की राय शीला से नहीं मिलती। हम चाहते हैं कि दिल्ली में दोबारा चुनाव हों और भाजपा को सरकार बनाने न दिया जाए।'
'दिल्ली में भाजपा सरकार बनाती है तो अच्छा होगा'
हाल ही में केरल के राज्यपाद पद से इस्तीफा देकर दिल्ली में वापसी करने वाली पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ कांग्रेसी नेत्री शीला दीक्षित ने यह कहकर चौंका दिया है कि अगर दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी सरकार बनाती है तो अच्छा होगा।
यही नहीं, उनका कहना है कि 'राजनीति में आमतौर पर आरोप-प्रत्यारोप लगते ही रहते हैं। दिल्ली का कोई भी विधायक फिर से चुनाव नहीं चाहता है। ऐसे में भाजपा अगर सरकार बनाती है तो अच्छा होगा।'
उन्होंने कहा, 'अगर दिल्ली बीजेपी प्रेसिडेंट ने दिल्ली में सरकार बनाने को लेकर बयान दिया है तो उन्होंने जिम्मेदारी के साथ ही ऐसा किया होगा।'
हालांकि प्रदेश कांग्रेस नेता लगातार भाजपा पर खरीदफरोख्त की कोशिशों का आरोप लगाते हुए दिल्ली में फिर से चुनाव की मांग कर रहे हैं।
शीला ने क्यों बोले ऐसे बोल?
दिल्ली में अरविंद केजरीवाल से विधानसभा चुनाव में बुरी तरह हारने के बाद शीला दीक्षित के राजनीति करियर पर सवाल उठने लगे थे। कांग्रेस ने उन्हें केरल का राज्यपाल नियुक्त कर इस पर मुहर भी लगा दी थी।
लेकिन भाजपा ने सत्ता में आते ही कांग्रेस की ओर से नियुक्त किए गए सभी राज्यपालों को हटाने का मन लिया। इसके बाद शीला दीक्षित ने पद से इस्तीफा देकर दिल्ली में वापसी कर ली।
तब इस बात की चर्चा बढ़ी की दिल्ली के माहौल को देखते हुए शीला दीक्षित दिल्ली की राजनीति में वापसी कर सकती हैं। लेकिन उन्होंने न केवल वापसी से इनकार किया, अब भाजपा के पक्ष में बयान भी दे रही हैं। अब आलाकमान शीला के इस बयान को कैसे लेता है, यह देखने वाली बात होगी।