दनकौर के पारसौल गांव निवासी आरोपियों के परिवार के एक व्यक्ति ने बताया कि विजयपाल मलिक पहले दिल्ली में डीटीसी बस चलाता था। लगभग 45 साल पहले विजयपाल गांव में रहने वाले अपने भाइयों से पैतृक संपत्ति के हिस्से के बदले रुपये लेकर दिल्ली में रहने लगा। बाद में चालक की नौकरी छोड़कर विजयपाल मलिक गाजियाबाद में ट्रांसपोर्ट का काम करने लगा। विजयपाल जल्द पैसा कमाना चाहता था। वह बीमा अभिकर्ता और वकील से बात करता रहता था। इसी बीच विजयपाल को एक्सीडेंटल केस में चार गुना क्लेम वाली बीमा पॉलिसी की जानकारी मिली। उस दौरान गाजियाबाद में दूसरे धर्म से ताल्लुक रखने वाले एक युवक को उसने ब्याज पर रुपये उधार दिए थे।
रुपया नहीं लौटाने पर विजयपाल ने युवक से कहा कि वह उससे पैसे नहीं मांगेगा, लेकिन इसके बदले युवक को बीमा पॉलिसी लेनी होगी जिसका उत्तराधिकारी वह स्वयं बनेगा। विजयपाल ने कुछ माह तक इस पॉलिसी की किस्त जमा की। लेकिन किसी तरह युवक और उसके परिजन ने विजयपाल का हिसाब कर दिया। इसके बाद उन्होंने बीमा पॉलिसी से विजयपाल का उत्तराधिकार हटा दिया। इसके बाद विजयपाल ने अपने बेटे अनिल व अन्य आरोपियों के साथ मिलकर आगरा में 31 जुलाई 2006 भिखारी को सेंट्रो कार में जिंदा जलाकर मारकर बीमा की राशि हड़पने की साजिश रची। अनिल के परिजन ने कोर्ट में याचिका देकर बीमा कंपनी से क्लेम के 83 लाख रुपये लेकर हड़प लिए। इसके बाद अनिल नाम बदलकर अहमदाबाद में टैक्सी चलाने लगा।
गुजरात पुलिस ने पारसौल लाकर स्कूल से कराई शिनाख्त
अहमदबाद क्राइम ब्रांच ने मुखबिर की सूचना पर सात नवंबर को आरोपी विजयपाल के बेटे अनिल को गिरफ्तार किया। गुजरात पुलिस को सूचना मिली थी कि दनकौर के रहने वाला अनिल मलिक फर्जी पहचान पत्र बनाकर राजकुमार चौधरी रखकर रह रहा है। पुलिस ने अनिल को गिरफ्तार किया। पूछताछ के बाद क्राइम ब्रांच आरोपी को लेकर पारसौल गांव आई। टीम ने अनिल के उस स्कूल में शिनाख्त की, जिसमेें उसने बचपन में पढ़ाई की थी। यहां पुराने रिकार्ड में उसका नाम अनिल ही निकला है।
गौतमबुद्ध नगर पुलिस से भी की थी शिकायत, नहीं मिला सुराग
विजयपाल और उसके परिवार के भाइयों से हिस्सा मांगने पर आपस में विवाद शुरू हुआ। बताया गया है कि विजयपाल के भाई व उनके परिवार को आरोपियों की करतूत के बारे में जानकारी थी। इसके चलते अनिल के चाचा धर्मपाल ने गौतमबुद्ध नगर में संबंधित अधिकारियों से मिलकर शिकायत की। गौतमबुद्ध नगर पुलिस ने मामले में जांच व पूछताछ तो की लेकिन अनिल के गुजरात में नाम बदलकर रहने के कारण उसका सुराग नहीं लगा पाई।
हत्या केस में होगी कार्रवाई, बीमा कंपनी कुर्क करा सकती है संपत्ति
इस मामले में गुजरात पुलिस आगरा पुलिस से वर्ष 2006 में हुई भिखारी की हत्या के केस की फाइल खुलवा सकती है। इसके बाद इस मामले में हत्या की धारा में कार्रवाई होगी। वहीं बीमा कंपनी धोखाधड़ी कर हड़पी गई क्लेम राशि वापस पाने के लिए कानूनी कार्रवाई कर विजयपाल व अन्य आरोपियों के खिलाफ संपत्ति कुर्क करने की कार्रवाई करा सकती है।
पहचान से बचने के लिए गाजियाबाद में किया अंतिम संस्कार
विजयपाल ने फर्जीवाड़े की साजिश रचकर बेटे अनिल को ताजमहल देखने कार से आगरा भेज दिया। इसके बाद आरोपियों ने भिखारी को खाने का लालच देकर कार में बैठाया। इसके बाद नशीली गोलियां खिलाकर कार में आग लगाकर भिखारी की जिंदा जलाकर हत्या कर दी। आरोपियों ने आगरा के संबंधित थाने में शार्ट सर्किट से आग लगने की रिपोर्ट दर्ज करा दी। कद काठी और हुलिया भिखारी का अनिल से काफी अलग था। इसके चलते आरोपी उसके शव को गांव नहीं लाकर गाजियाबाद ले जाकर अंतिम संस्कार किया। जिससे ग्रामीण उसे पहचान नहीं सकें।