मारुति कांड की दूसरी बरसी पर सैकड़ों श्रमिकों ने शुक्रवार को प्रदर्शन किया और एकजुटता दिखाने के लिए जमकर नारेबाजी की। इस दौरान गौशाला ग्राउंड, राजीव चौक, मारुति उद्योग विहार प्लांट, मानेसर प्लांट और लघु सचिवालय पुलिस छावनी में तब्दील रहा।
दोपहर बाद 3:45 बजे मारुति सहित सीटू और एटक श्रमिक संगठनों के लोग राजीव चौक, कमला नेहरू पार्क और गौशाला ग्राउंड में एकत्र हुए।
इन स्थानों से सैकड़ों की संख्या में श्रमिक 4 बजे लघु सचिवालय की ओर रवाना हुए। सभी के हाथों में मांगों से संबंधित तख्तियां थीं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हथियारबंद पुलिसकर्मी रैली के पीछे-पीछे चल रहे थे।
'एचआर हेड की हत्या में श्रमिको को फंसाया गया'
लघु सचिवालय पर श्रमिकों को संबोधित करते हुए मारुति-सुजुकी मजदूर संघ के संरक्षक कुलदीप जांघू ने कहा कि उनकी सरकार और मारुति प्रबंधन से मांग है कि 18 जुलाई, 2012 बर्खास्त 546 कर्मियों का काम पर वापस लिया जाए।
वहीं तकरीबन डेढ़ सौ जेल में बंद कर्मचारियों का जेल से रिहा किया जाए। जांघू ने 18 जुलाई, 2012 को हुए मारुति कांड के लिए प्रबंधन और हरियाणा सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
मारुति पावर ट्रेन के यूनियन के अध्यक्ष पवन कुमार ने सरकार से मांग की है कि मारुति कांड की न्यायिक जांच कराई जाए। एचआर हेड की हत्या में श्रमिकों को फंसाना मारुति प्रबंधन और प्रशासन की मिलीजुली चाल है।
सीटू और एटक का समर्थन
सीटू और एटक का भी मारुति कर्मचारियों को समर्थन मिला। लघु सचिवालय पर सीटू के प्रदेश महासचिव सतबीर सिंह ने भी संबोधित किया। उन्होंने कहा कि मारुति के बर्खास्त कर्मियों को काम पर वापस लिया जाए। वहीं जेल में बंद मारुति के साथियों को रिहा कराने की भी सरकार से अपील की।
मारुति कांड की बरसी पर श्रमिकों लघु सचिवालय पर धरना-प्रर्दशन करने के बाद जिला उपायुक्त को ज्ञापन सौपा। एटक के जिला सचिव अनिल पंवार ने बताया कि जिला उपायुक्त खुद धरना स्थल पर पहुचें जहां पर उन्हें ज्ञापन दिया गया। उन्होंने श्रमिकों को आश्वासन दिया कि वह उनकी मांगों का पत्र मुख्यमंत्री तक जरूर पहुंचाएंगे।
इस मौके पर मारुति उद्योग कामगार यूनियन के महासचिव कुलदीप जांघू ने कहा कि ज्ञापन में मुख्यमंत्री से मांग की गई है कि जेल में बंद मारुति के सभी कर्मियों को रिहा किया जाए। क्योंकि वह निर्दोष हैं। मारुति कांड के न्यायिक जांच की भी मांग की गई।
श्रमिकों की अन्य मांगें
-न्यूनतम वेतन कम से कम 15,000 रुपये किया जाए
-मारुति के बर्खास्त कर्मियों को वापस लिया जाए
-गुड़गांव से बावल तक चल रहे औद्योगिक विवाद का ठोस हल
-विभिन्न कंपनियों में श्रमिकों की जायज मांगों को माना जाए
-श्रम विभाग को अपनी भूमिका ठीक करनी चाहिए
-श्रमिकों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए
-कंपनी प्रबंधन शोषण बंद करे