15 जनवरी को खुले स्कूल अचानक बढ़ी ठंड के कारण बृहस्पतिवार से फिर बंद हो गए हैं। डीएम ने 16 से 18 तक स्कूल बंद रखने के निर्देश दिए हैं। 19 जनवरी को रविवार है ऐसे में अब कक्षा एक से आठ तक की पढ़ाई 20 जनवरी से शुरू होगी।
ठंड में बच्चों को स्कूल भेजने की समस्या से दो-चार हो रहे पैरेंट्स ने भी राहत की सांस ली है। लंबी छुट्टी के बाद बुधवार को कक्षा एक से आठ तक के सभी स्कूल खुल गए थे। स्कूल खुलने के पहले ही दिन कड़ाके की ठंड के कारण शासन और प्रशासन ने स्कूलों की छुट्टी बढ़ाने का फैसला लिया।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. प्रवेश यादव ने बताया कि छुट्टियों का आदेश जिले के सभी कक्षा एक से आठ तक के स्कूल पर लागू होगा। उन्होंने कहा कि छुट्टी केवल बच्चों की हुई है। परिषदीय स्कूल के शिक्षकों को अपनी ड्यूटी निभानी होगी। जिन शिक्षकों को बीएलओ व पोलियो अभियान में लगाया गया है, ऐसे शिक्षक छुट्टी पर नहीं रहेंगे।
स्कूल में छुट्टी, खुद पता लगाना पड़ता है
इंडिपेंडेंट स्कूल फेडरेशन के अध्यक्ष सुभाष जैन का कहना है कि स्कूल बंद करने के डीएम के निर्देश की सूचना हमें खुद हीमालूम करनी पड़ती है। छुट्टी के निर्देश की सूचना इतनी लेट मिलती है कि एक दिन बाद तक कई स्कूल खुल जाते हैं। हमने जानकारी मिलने के बाद पैरेंट्स को एसएमएस से छुट्टी की सूचना दे दी है।
अंग्रेजों के जमाने का सूचना सिस्टम
सर्दी बढ़ने पर अवकाश की आपात सूचना भेजने में भी विभागीय पत्राचार ही माध्यम है। सूचना समय पर न मिलने के कारण ठिठुरते बच्चे पहले स्कूल जाते हैं, तब तक अवकाश का आदेश पहुंच जाता है और कंपकंपाते वापस आते हैं। हैरत की बात यह है कि सूचना आदान-प्रदान के परंपरागत तरीके में सुधार की चिंता किसी को नहीं है।
यह है आदेश जारी होने का तरीका
एडीएम की अध्यक्षता वाली कमेटी डीएम को मौसम के हालात से लिखित में अवगत कराती है। इसके बाद वह बीएसए को मुहर-हस्ताक्षर वाला पत्र भेजकर अवकाश करने को कहते हैं। डीएम के आदेशों का हवाला देकर बीएसए आफिस में दूसरा पत्र तैयार होता है। पत्रांक संख्या डालकर इसको चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के द्वारा स्कूलों तक भेजा जाता है। वहां से अध्यापकों के हस्ताक्षर कराकर वह पत्र वापस आफिस में जमा कराया जाता है।
यह हो सकता है
ज्यादातर शिक्षकों और अफसरों के पास मल्टीमीडिया मोबाइल फोन हैं। लैपटॉप और डेस्कटॉप भी ज्यादातर के पास हैं। स्कूलों में कंप्यूटर सिस्टम भी लगाए गए हैं। ऐसे में एक मैसेज-मेल भेजकर मिनटों में संदेशों का आदान-प्रदान किया जाना संभव है। इनका प्रयोग करने में खर्च भी नाममात्र का आएगा।