रेलवे की आंतरिक जांच में पाया गया कि इस तरह के बिल कभी भुगतान के लिए नहीं आए थे। यह भी पाया गया कि बिल के आधार पर फर्जी नामों से ई-फाइलें खोलकर पे एंड अकाउंट ऑफिस रेलवे बोर्ड, रेल भवन को मंजूरी का आदेश जारी किया गया।
घोटाले का खुलासा होने के बाद से आरोपी फरार
घोटाले के बारे में पता चलने के बाद आरोपी अनुराग फरार हो गया। उसने अपना फोन बंद कर लिया और कार्यालय नहीं आया। रेलवे ने विभागीय कार्रवाई करते हुए उसे आठ नवंबर को निलंबित कर दिया। फिलहाल इस मामले में पुराने रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि यह घोटाला काफी बड़ा हो सकता है। पुलिस ने रेलवे से भी इससे संबंधित कुछ कागजात मांगे हैं।