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CWG: स्वर्ण पदक की दहलीज पर खड़े सतीश मना रहे जश्न, ऐसी है इनके संघर्ष की कहानी

Thu, 12 Apr 2018 01:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बुलंदशहर
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satish yadav - फोटो : अमर उजाला
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चोला चौकी क्षेत्र के गांव पचौता निवासी सूबेदार सतीश यादव ने ऑस्ट्रेलिया में चल रहे राष्ट्रमंडल खेलों में बॉक्सिंग में अपना परचम लहराया है। सतीश ने कांस्य पदक पक्का कर लिया है। अब वह गोल्ड की तैयारी में जुट गए हैं।

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कांस्य पदक पक्का करने की खबर पर ग्रामीण खुशी से फूले नहीं समा रहे हैं। ग्रामीणों ने सतीश के घर पहुंचकर परिजनों को बधाई दी। आस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में चल रहे 21 वें राष्ट्रमंडल खेलों में बुलंदशहर के लाल ने अपना जलवा दिखाया है।

चोला चौकी क्षेत्र के गांव पचौता निवासी सतीश यादव पुत्र किरन पाल सिंह यादव ने बॉक्सिंग में अपना परचम फहराते हुए त्रिनिदाद टोबैगो के निगुल पॉल को हराकर सेमीफाइनल नें प्रवेश किया है।
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अब वह 13 अप्रैल को सेमीफाइनल और 14 को फाइनल खेलने की तैयारियों में जुट गए हैं। सतीश यादव की कामयाबी से पूरा गांव फूला नहीं समा रहा है।  गांव के लोगों ने सतीश यादव के घर पहुंचकर जश्न मनाते हुए सतीश की कामयाबी की सराहना की।

साथ ही ग्रामीणों ने 13 और 14 को होने वाले सेमीफाइनल और फाइनल मैच के लिए भी उम्मीदों को कायम रखते हुए गोल्ड जीतने के लिए अग्रिम शुभकामनाएं दी हैं।

आर्मी में चयन के साथ 2008 से शुरू हुआ था बॉक्सिंग का सफर

satish yadav - फोटो : अमर उजाला
चोला के गांव पचौता निवासी सतीश यादव पुत्र किरनपाल सिंह यादव को बचपन से बॉक्सिंग का जुनून नहीं था। करीब दस वर्ष पूर्व आर्मी में चयनित होने के बाद सतीश यादव को अचानक बॉक्सिंग का चस्का लगा और आर्मी ट्रेनिंग के दौरान ही ट्रेनिंग भी शुरू कर दी।

रानीखेत में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद सतीश ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक मेडल पर कब्जा जमाते हुए विभिन्न प्रतियोगिताओं में दो दर्जन से अधिक मेडल जीते हैं।

एक जनवरी 1989 को एक साधारण किसान के परिवार में जन्मे सतीश यादव के पिता ने कभी नहीं सोचा था कि उनका बेटा बॉक्सिंग में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए कदम बढ़ाएगा।

वर्ष 2008 में आर्मी ज्वाइन की तो परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं रहा, हालांकि किरनपाल सिंह के चार बेटों में दूसरे नंबर के सतीश यादव ने अचानक से ट्रेनिंग के दौरान बॉक्सिंग की ट्रेनिंग भी शुरू की तो परिजन कुछ भौचक्के जरूर हुए, लेकिन बाद में परिजनों ने सतीश यादव को आगे बढ़ने की सलाह दी।

ट्रेनिंग पूरी करने के बाद सतीश यादव ने हैदराबाद में हुई राष्ट्रीय प्रतियोगिता में पहली बार में ही गोल्ड पर पंच मारते हुए अपने इरादे जाहिर कर दिए।

इसके बाद सतीश यादव ने फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक लगातार मेडल जीतकर दो दर्जन से अधिक मेडल एकत्रित कर दिए।

करीब सात वर्ष पूर्व परिजनों ने सतीश की शादी की तो ग्रामीणों को लगा कि उसका सफर यहीं थम जाएगा, लेकिन सतीश ने मन में कुछ और ही ठान रखी थी। शादी के बाद पत्नी को साथ लेकर सतीश ने मेडल जीतने का सिलसिला जारी रखा।

हाल के दिनों में जब सतीश ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया तो परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सतीश की पत्नी, बड़ी बेटी और छोटे बेटे भी पिता की सफलता से काफी खुश हैं। हालांकि अभी दोनों को ही नहीं पता है कि देश के लिए मेडल लाना कितना बड़ा काम है।       

2014 में एशियाई खेलों में भी जीता था कांस्य
वर्ष 2014 में हुए दक्षिण कोरिया के इंचियोन में आयोजित एशियाई खेलों में सतीश कुमार ने अपने खेल का जलवा दिखाते हुए कांस्य पदक जीता था। कांस्य पदक लेकर वापस लौटे सतीश कुमार को तत्कालीन सपा सरकार द्वारा 15 लाख रुपये की धनराशि भी दी गई थी।       

'सतीश यादव ने देश के लिए बॉक्सिंग में मेडल लेकर देश का नाम ऊंचा किया है। देश के लिए खेलना अपने आप में गर्व की बात है, सतीश ने देश के लिए मेडल जीता है। उसने देश में जिले का नाम रोशन कर खिलाड़ियों को लगन से खेलने के लिए प्रेरित किया है। उम्मीद है सतीश देश के लिए गोल्ड लेकर आएंगे।' - जसजीत कौर, प्रभारी डीएम

'सतीश को ब्रॉंज मेडल पक्का करने की बधाई, साथ ही आने वाले मैच में गोल्ड मेडल जीतने के लिए शुभकामनाएं। युवाओं को खेलों के प्रति जुनून होना चाहिए। जुनून के साथ खेल को खेलने से ही तरक्की का मार्ग प्रशस्त होता है। परिजनों को भी बधाई देता हूं।' - मुनिराज जी, एसएसपी

'किसान के बेटे ने देश के लिए मेडल जीतकर न केवल देश बल्कि जिले का नाम रोशन किया है। सतीश और उसके परिजनों को इसके लिए बधाई। सतीश से गोल्ड मेडल की भी उम्मीद बढ़ गई हैं। प्रधानमंत्री द्वारा खेलों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का असर दिखने लगा है।' - डॉ. भोला सिंह, सांसद
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सेमीफाइनल और फाइनल के लिए लगा दूंगा जान

satish yadav - फोटो : अमर उजाला
आस्ट्रेलिया में हो रहे कामनवेल्थ गेम्स में ब्रॉंज मेडल पक्का करने के बाद आशीष शुक्ला से फोन पर हुई बातचीत में सतीश ने अपना अनुभव शेयर किया है। सतीश यादव से बातचीत के कुछ अंश

सतीश यादव ने फोन पर अमर उजाला को बताया कि कॉमनवेल्थ के लिए क्वालीफाई करना अपना आप में एक गर्व की बात है। कहा कि 13 और 14 अप्रैल को होने वाले सेमीफाइनल और फाइनल मैच में पूरी जान लगा दूंगा।

सतीश यादव ने कहा कि परिजनों और गांव के बुजुर्गों के आशीर्वाद के बिना यह मुकाम हासिल करना संभव नहीं है। उन्होंने अपने बचपन के दिनों को भी याद करते हुए कहा कि उनके परिजनों ने उन्हें बड़ी मेहनत से पढ़ाया है।

आस्ट्रेलिया में हुए कॉमनवेल्थ के अपने अब तक के सफर के बारे में सतीश ने बताया कि अब तक के सफर में सभी मैचों में बढ़िय़ा प्रदर्शन किया।

साथ ही बताया कि टीम के साथी खिलाड़ियों से भी भरपूर सहयोग मिला है। उन्होंने देश के लिए सोना जीतकर लाने का वादा भी किया।
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