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यहां स्कूल की जमीन पर हो रहा गंदा खेल

Wed, 21 Jan 2015 08:25 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, फरीदाबाद
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सदपुरा गांव में सरकारी स्कूल की जमीन पर गरीबों को महात्मा गांधी ग्रामीण बस्ती योजना के तहत की गई 21 प्लाटिंग को अतिरिक्त उपायुक्त ने भी अपनी जांच में गलत पाया है, लेकिन इसकी सिफारिश करने वाले डीडीपीओ व अन्य अधिकारियों को बचाने की कोशिश की गई है।
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शिकायतकर्ता का कहना है कि वह एडीसी की जांच से संतुष्ठ नहीं है। इसकी दोबारा शिकायत सीएम विंडो से की जाएगी। क्योंकि जांच अधिकारी ने बगैर उन्हें सुने अपना जवाब भेज दिया।

ज्ञात कि सदपुरा गांव में सरकारी स्कूल की जमीन पर गांव के सरपंच ने 21 ग्रामीणों को प्लाटिंग कर दी। जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी (डीडीपीओ) ने भी इसे अनदेखा किया।
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राजस्व रिकार्ड में वह जमीन स्कूल की बताई जा रही है। सरकार के नियमानुसार स्कूल की जमीन पर प्लाटिंग नहीं की जा सकती। खास बात यह है कि सरपंच ने प्लाटिंग करने के बाद उसकी रजिस्ट्री भी करा दी है।

गांव के ही रहने वाले मांगेराम शर्मा ने इसकी शिकायत सीएम विंडो में की थी। विकास एवं पंचायत विभाग के प्रधान सचिव ने अतिरिक्त उपायुक्त को जांच कर मामले को सुलटाने का आदेश दिया था।

जांच में एडीसी ने कहा है कि गांव में खसरा नंबर-21 का कीला नंबर-8 व 9 में 100-100 वर्ग गज के प्लाट काटे गए हैं। राजस्व पटवारी द्वारा जारी की गई नकल जमाबंदी के अनुसार जमीन का मालिक पंचायत को दिखाया गया है।

डीडीपीओ ने 26 जुलाई 2012 को जमीन का निरीक्षण कर उसकी रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट के अनुसार मौके पर खसरा नंबर-21 का कीला नंबर-7 की पांच कनाल 13 मरला भूमि पर स्कूल बना हुआ है। डीडीपीओ के मुताबिक कीला नंबर-8 के कुछ भाग पर कृषि भी की जा रही है। इस भूमि पर प्लाट दिए जाना उचित होगा।

हल्का पटवारी ने 10 सितंबर 14 को दिए बयान में बताया है कि राजस्व रिकार्ड जमाबंदी वर्ष 1956-57 में उक्त जमीन स्कूल खेलकूद मैदान के नाम पर दर्ज है। एडीसी ने अपने रिपोर्ट देते हुए कहा कि पूरे मामले में जिला पंचायत एवं विकास अधिकारी के विरुद्ध भ्रष्टाचार का कोई मुद्दा साबित नहीं होता।

शिकायतकर्ता मांगेराम शर्मा का कहना है कि जब पटवारी ने इस बात का जिक्र किया है कि जमीन स्कूल की है तो उसकी प्लाटिंग क्यों की गई। इसमें सरपंच और डीडीपीओ की भूमिका संदिग्ध है।
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उन्होंने कहा कि एडीसी ने बगैर उन्हें सुने अपना जवाब दे दिया है। जवाब से संतुष्ट नहीं हूृं। इसकी दोबारा शिकायत सीएम विंडो से करने का निर्णय लिया है।
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