सूबे में असामाजिक तत्व सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ सकते हैं। खतरा बना है, लिहाजा सौहार्द कायम रखने को पुलिस सभी धर्मों के मोअजिज लोगों से मदद लेगी।
गांवों में एस-7 और शहरों में एस-10 कमेटियां बनाई जाएंगी। इस संबंध में डीजीपी ने प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस प्रमुखों को गाइडलाइन भेजी हैं और अमल करने की हिदायत दी है।
यह व्यवस्था बुलंदशहर में एसएसपी अनंत देव ने शुरू की थी, जिसे शासन ने पसंद किया और इसे पूरे प्रदेश में लागू करने के निर्देश जारी किए हैं।
शासन का मानना है कि ऐसा करने से विवादों का निबटारा और बेहतर तरीके से किया जा सकता है। इससे आम लोगों को थाने और न्यायालय भी नहीं जाना पड़ेगा।
पुलिस मित्र और सामुदायिक पुलिसिंग जैसी जरूरी और व्यावहारिक प्रणाली का सदुपयोग भी हो सकेगा। डीजीपी जगमोहन यादव का कहना है कि सांप्रदायिक दंगे की वजह छोटी-छोटी घटनाएं होती हैं, जिनका समाधान दोनों संप्रदायों के लोग बेहतर तरीके से कर सकते हैं।
एस-7
प्रत्येक गांव स्तर पर ग्राम सभा के चुनाव में प्रधान पद के सभी प्रत्याशियों और गांव के संभ्रांत लोगों को लिया जाएगा। इन सभी को एसएसपी का हस्ताक्षरित आई-कार्ड दिया जाएगा। बीट सिपाही और चौकीदार एस-7 से संपर्क में रहेंगे।
एस-10
शहर में बनी पीस कमेटियां सांप्रदायिक सौहार्द कायम करने में पूरी तरह से प्रभावी नहीं हैं। लिहाजा मिश्रित आबादी वाले इलाकों में सभी धर्मों के मोअजिज लोगों के 10 लोगों का चयन कर एस-10 बनाई जाएगी। इन्हें आई कार्ड दिया जाएगा। सभी कांस्टेबलों के मोबाइलों में एस-10 के नंबर फीड़ होंगे।
एसएसपी धर्मेंद्र सिंह का कहना है कि गाजियाबाद में भी डीजीपी के निर्देशों का पालन शुरू हो गया है।