एससीएसटी एक्ट स्पेशल कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्नल वीरेंद्र प्रताप सिंह को एडीएम के परिवार से मारपीट, छेड़छाड़ केस में जमानत दे दी है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने सोमवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट में घटना के दौरान का सीसीटीवी फुटेज (फोटो) पेश किया और विभिन्न दलील देते हुए बहस की।
दोनों पक्षों की अधिवक्ताओं की बहस सुनने के बाद अदालत ने सेवानिवृत्त कर्नल की जमानत मंजूर कर ली। जनपद दिवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव तोंगड़, अधिवक्ता रजनीश यादव व पवन भाटी ने बताया कि सेक्टर-20 थाना पुलिस द्वारा स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सेवानिवृत्त कर्नल पर छेड़छाड़, मारपीट और एससीएसटी एक्ट में दर्ज किए केस के संबंध में सुनवाई हुई।
इस दौरान रिटायर्ड कर्नल के परिजन अदालत में पहुंचे थे। कोर्ट में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने बहस के दौरान दलील दी। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्नल ने देश के लिए कई लड़ाई लड़ीं हैं।
retired colonel
वह बुजुर्ग हैं और विदेश में परिवार के साथ रहते हैं। कभी-कभी अपना घर देखने आते हैं। वादी पक्ष पड़ोसी है और उन्होंने गैराज में अपना कमरा बनवा लिया है। इस कमरे को किराये पर देकर एक किरायेदार को बसा लिया है।
इसकी शिकायत सेवानिवृत्त कर्नल ने प्राधिकरण कार्यालय से की। जिससे नाराज होकर केस दर्ज कराकर उन्हें झूठा फंसाया गया है। घटना के दौरान के सीसीटीवी फुटेज के फोटो जिसमें वादी पक्ष के लोग कर्नल को पीट रहे हैं।
केस डायरी में संलग्न कर दिए गए हैं। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्नल वीरेंद्र प्रताप सिंह की जमानत मंजूर कर ली है।
चौकी इंचार्ज के बाद थाने का मुंशी निलंबित
रिटायर्ड कर्नल और आरोपी गनर व नौकर
- फोटो : अमर उजाला
एडीएम की पत्नी से छेड़छाड़ के मामले में सेवानिवृत्त कर्नल की गिरफ्तारी के बाद हथकड़ी लगाने वाले थाने के मुंशी वासिफ अली को एसएसपी ने निलंबित कर दिया है। मुंशी को उच्चतम अदालत के आदेश की अवहेलना का दोषी माना गया है।
इससे पहले इसी प्रकरण में सीओ, इंस्पेक्टर का तबादला किया जा चुका है और चौकी इंचार्ज को भी निलंबित किया जा चुका है। उधर, थाने में बीते मंगलवार को दिवस अधिकारी कौन था उसकी भी तलाश हो रही है। यदि वह सही से काम करता तो हथकड़ी लगाई ही नहीं जाती।
सेक्टर-29 निवासी सेवानिवृत्त कर्नल वीरेंद्र प्रताप सिंह चौहान पर एडीएम की पत्नी द्वारा लगाए गए छेड़छाड़ के आरोप में हथकड़ी लगाने के मामले में पुलिस ने मुंशी को दोषी माना है।
रिटायर्ड आर्मी अफसर की गिरफ्तारी के खिलाफ प्रदर्शन करते पूर्व सैनिक
- फोटो : अमर उजाला
अधिकारियों की मानें तो जब भी किसी भी मामले का कोई आरोपी गिरफ्तार किया जाता है तो वह थाने के मुंशी की जिम्मेदारी होती है कि उसे किस तरह अदालत भेजा जाए। इसलिए जब कर्नल गिरफ्तार किए गए थे तो मुंशी को तय करना था कि उनको बिना हथकड़ी के ही अदालत तक पहुंचाया जाए।
अधिकारियों ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना मानते हुए मुंशी को निलंबित कर दिया है। इससे पहले सीओ अनित कुमार और इंस्पेक्टर मनीष कुमार सक्सेना का तबादला कर दिया गया था और सेक्टर-29 चौकी प्रभारी रहे रवि तोमर को भी इसी मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में निलंबित किया गया था।