शुरू होगा नया विभाग
एम्स में अध्यात्म और विज्ञान विभाग शुरू कर रहा है। इस विभाग में अध्यात्म की मदद से मरीजों के उपचार की दिशा में काम किया जाएगा। साथ ही ध्यान, प्रार्थना और चिंतन जैसे अभ्यासों के माध्यम से शरीर पर सकारात्मक प्रभाव के लिए प्रयास किया जाएगा।
मंत्रोच्चार से पहले और बाद की हलचल की भी पड़ताल
अध्ययन के दौरान मंत्र उच्चारण से पहले वायरलैस फिजियोलॉजी मॉनिटरिंग सिस्टम को अध्ययन में शामिल लोगों के शरीर में लगाया जाता है। यह पहले, इसके दौरान और बाद में त्वचा के तापमान, सांस लेने की रफ्तार, श्वसन प्रणाली पर असर और इलेक्ट्रो कार्डियो ग्राफ में बदलाव का आकलन करता है। देखा गया है कि यदि कोई सप्ताह तक रोजाना 15 मिनट तक मंत्रों का उच्चारण करता है तो इन सबमें धीरे-धीरे सुधार आता है। अध्ययन के दौरान हार्ट रेट वेरिएबिलिटी में भी सुधार देखा गया है। डॉक्टरों का कहना है कि जिस व्यक्ति का हार्ट रेट जितना ज्यादा सही होगा, उसका दिल भी बेहतर काम करेगा। इसके अलावा मंत्र के उच्चारण से होने वाले वाइब्रेशन से फेफड़ों में सुधार होता है और उसमें सांस को रोकने की क्षमता बढ़ जाती है।
अध्ययन में इन पर नजर
- त्वचा के तापमान
- सांस लेने की रफ्तार
- श्वसन प्रणाली पर असर
- इलेक्ट्रो कार्डियो ग्राफ (ईसीजी) में बदलाव