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आज राजपथ पर दिखेगी मिनी इंडिया की झलक

Wed, 22 Jan 2014 09:22 PM IST
अमर उजाला, नई दिल्ली
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गणतंत्र दिवस के फुल ड्रेस रिहर्सल में बृहस्पतिवार को राजपथ पर मिनी इंडिया की झलक देखने को मिलेगी।
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इस दौरान 12 राज्यों समेत केंद्र शासित चंडीगढ़ के विकास और संस्कृति की झलक तो मंत्रालय समेत सेना अपनी ताकत दिखाएगी। रिहर्सल रायसीना हिल से शुरू होकर विजय चौक होते हुए इंडिया गेट से लाल किले पर संपन्न होगी।

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परेड का नेतृत्व दिल्ली क्षेत्र के जनरल ऑफिसर कमांडिंग व अति विशिष्ट सेवा मेडल, सेना मेडल लेफ्टिनेंट जनरल सुब्रोतो मित्रा करेंगे।

रिहर्सल में सबसे आगे सेना का 61 कैवलरी का दस्ता होगा। इसमें 51 घुड़सवार शामिल होंगे। विश्व में अपनी तरह का एकमात्र घुड़सवार दस्ता ग्वालियर लांसर सेरेमोनियल ड्रेस में होगा। इसकी कमान कैप्टन अर्पित राठी संभालेंगे। पीछे कैप्टन आकाश मजूमदार की अगुवाई में भारतीय सेना के मुख्य युद्ध टैंक टी-90 की गर्जना सुनाई देगी।
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अगला दस्ता इंफेंट्री कॉम्बेट व्हीकल बीएमपी-2 सारथ का होगा। इसकी कमान लेफ्टिनेंट तरुण अरोड़ा करेंगे। पीएमएस ब्रिज सिस्टम, ओएसए-एके प्रक्षेपास्त्र प्रणाली के बाद स्मर्च मल्टी लांचर रॉकेट सिस्टम, ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र, ट्रांस्पोर्टेबेल सैटेलाइट टर्मिनल दिखेगा। उसके बाद अर्द्धसैनिक बलों के दस्ते और सेना के बैंड धुनों में देश और सेना की शान सुनाएंगे।

तीनों सेनाओं की ताकत के बाद राज्यों और मंत्रालयों की झांकियां पेश होंगी। सबसे पहले उत्तर प्रदेश की झांकी होगी।

इसमें दर्शकों को सुबह-ए-बनारस की झलक संग मिर्जा गालिब द्वारा बनारस शहर पर ‘चिरागे दैर’ (मंदिर का दिया) पर लिखी नज्म ‘तआल्लाह बनारस चश्मे बददूर, बहिश्ते-खुर्रमो-फिरदौस मआमूर’ (बनारस एक हरा भरा सुंदर स्वर्ग है, अल्लाह इसे बुरी नजर से बचाए) सुनने को मिलेगी।

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झांकी में सुबह की पहली किरण में गंगा और घाट संग मंदिरों की कहानी पेश होगी। आगे भारत रत्न बिस्मिल्ला खां तो पिछले भाग में बनारस के घाटों, विश्व प्रसिद्ध मंदिरों संग सुबह के दृश्य दिखाए जाएंगे।

यूपी के बाद उत्तराखंड जड़ी-बूटियों संग लोकनृत्यों की झलक तो आधुनिक शहर चंडीगढ़ के ‘रॉक गार्डन’ में भव्य प्रवेश द्वार पर पहाड़ियों, पत्थरों, टूटे बोन चाइना के टुकड़े, बेकार फ्लोरोसेंट ट्यूब्स, अनुपयोगी चूड़ियों के टुकड़े, इमारती कचरे, कोयले और मिट्टी के मिश्रण, महलों, फौजियों, बंदरों, ग्रामीण जीवन, महिलाओं और मंदिरों के एक स्वप्निल संसार दिखाएगा।
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जम्मू-कश्मीर की तीन गुर्जर बंजारा संस्कृतियों संग लोक गायन के सुर भी सुनने को मिलेंगे। असम की झांकी में महान गायक संगीतकार, लेखक, कवि और फिल्म निर्माता पद्मश्री ‘डॉ. भूपेन हजारिका’ की आवाज सुनने को मिलेगी।
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