साइबरसिटी में दो मासूम बच्चियों के साथ हैवानियत का खेल खेला गया। एक घटना में पिता ने और दूसरी में चचेरे भाई ने मासूमों के साथ दुष्कर्म कर रिश्तों को तार-तार कर दिया।
पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुराने गुड़गांव के सुभाष नगर में नौ वर्षीय बच्ची के साथ पड़ोस में रहने वाले चचेरा भाई दुष्कर्म कर फरार हो गया।
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही भी उजागर हुई। बच्ची को सिविल अस्पताल लाए जाने पर डॉक्टरों ने बिना जांच के पीड़िता को दिल्ली सफदरजंग अस्पताल रेफर कर दिया।
पिता ही निकला बलात्कारी
लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे पुलिस केस बताते हुए इलाज करने से मना कर दिया। सोमवार देर रात बच्ची को दोबारा सिविल अस्पताल लाया गया जहां बच्ची को दाखिल कराया गया।
इस मामले में पुलिस ने 17 वर्षीय आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। दूसरे मामले में नए गुड़गांव के नाथूपुर गांव में रहने वाले परिवार की 12 वर्षीय बच्ची के साथ उसके पिता ने ही दुष्कर्म को अंजाम दे दिया।
दो महीने पहले हुई घटना के बाद किसी तरह इसकी जानकारी पीड़िता की मां को हुई। जिसके बाद डीएलएफ फेज दो थाना पुलिस ने देररात आरोपी पिता के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया गया। मंगलवार को उसे कोर्ट ने जेल भेज दिया।
रेप के बाद तड़पती रही मासूम, किसी को नहीं आई दया
मासूम बच्चियों के साथ हुई हैवानियत के बाद सरकारी तंत्र का चेहरा भी सामने आ गया। मरीजों को रेफर करने के खेल में बदनामी झेल रहे सिविल अस्पताल की संवेदना इस मामले में भी नहीं जागीं।
आठ घंटे तक दो अस्पतालों के बीच चक्कर काटते हुए इलाज के लिए बच्ची तड़पती रही। अंत में सीएमओ तक बात पहुंचने के बाद मामला गंभीरता से लिया गया।
अब मामला सुर्खियों में आने के बाद अधिकारी पूरे मामले की जानकारी नहीं होने की बात कह पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। सोमवार को साइबरसिटी में मासूम बच्चियों के साथ हुई हैवानियत की घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही भी उजागर हो गई।
बिना जांच के ही रेफर कर दी खून से लथपथ बच्ची
सुभाष नगर में हैवानियत का शिकार होने के बाद सोमवार को खून से लथपथ नौ वर्षीय मासूम को दोपहर तीन बजे सिविल अस्पताल इलाज के लिए लाया गया था।
लेकिन आपातकालीन विभाग में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों ने बिना डॉक्टरी जांच के उसे दिल्ली सफदरजंग रेफर कर दिया। इंतहा का आलम उस वक्त हो गया जब दिल्ली की दूरी तय करने के बाद पीड़िता को सफदरजंग अस्पताल लेकर पहुंचे तो डॉक्टरों ने गुड़गांव पुलिस का मामला बताते हुए इलाज से इनकार कर दिया।
इलाज की बजाय उन्हें गुड़गांव पुलिस से रुक्का लिखाकर लाने को कह दिया। पीड़ित पिता ने बताया कि देररात करीब 10 बजे वे दोबारा सिविल अस्पताल पहुंचे तो यहां डॉक्टर ही नहीं मिले।
घंटों दर्द से कराहती रही बच्ची
आसपास के लोगों की मदद से सीएमओ को भी कॉल किया। सीएमओ खुद अस्पताल पहुंच गईं। इस दौरान इलाज के लिए बच्ची घंटों दर्द से करहाती रही।
दो घंटे इंतजार के बाद किसी तरह डॉक्टर पहुंचे और बच्ची को दाखिल किया गया। मीडिया के सामने पूरी घटना आने के बाद बच्ची का इलाज शुरू कर दिया गया।
इस घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग के अलावा पुलिस महकमे की लापरवाही सामने आने के बाद अधिकारी जानकारी न होने की बात कहते हुए पल्ला झाड़ रहे हैं।