पहली बार वोट देने वाले छात्रों ने सोशल मीडिया से जुटाई चुनावी जानकारी, पिछले काम और सक्रियता को माना अहम
ज्योति सिंह
नई दिल्ली। नई किताबें, नए दोस्त और कॉलेज की नई दुनिया के बीच पहली बार मतदान करने वाले छात्रों के लिए डूसू चुनाव का अनुभव सोशल मीडिया से भी जुड़ा रहा। नॉर्थ कैंपस में पोस्टर, नारे और प्रचार के साथ इंस्टाग्राम रील, शॉर्ट वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट ने नए मतदाताओं तक उम्मीदवारों और उनके मुद्दों को पहुंचाया। हालांकि, रीलों और प्रचार सामग्री के बीच छात्रों ने मुद्दों और प्रत्याशियों के पिछले काम को समझने की कोशिश भी की।
मिरांडा हाउस की प्रथम वर्ष की छात्रा काजल के लिए सोशल मीडिया चुनावी जानकारी हासिल करने का आसान माध्यम रहा। उनका कहना है कि मोबाइल पर वीडियो के जरिए कई जानकारियां एक जगह मिल जाती हैं। हालांकि, निजी वीडियो और प्रचार सामग्री की भरमार के बीच उन्हें लगता है कि कई बार असली चुनावी मुद्दे पीछे छूट जाते हैं। उनके मुताबिक उम्मीदवारों को छात्रों के सवालों का जवाब देना चाहिए।
एआई वीडियो से ज्यादा जरूरी मुद्दों पर बात
तृतीय वर्ष के छात्र योगेंद्र सिंह भाटी के मुताबिक पहले चुनाव को समझने के लिए छात्र दोस्तों और वरिष्ठों से बातचीत करते थे, लेकिन अब सोशल मीडिया भी इसका अहम माध्यम बन गया है। प्रत्याशियों से जुड़ी एआई जनरेटेड वीडियो भी प्रसारित की गईं। ऐसे में किसी प्रचार सामग्री पर बिना जांचे भरोसा करने के बजाय उम्मीदवारों के मुद्दों और काम को देखना जरूरी है। उन्होंने बताया कि उन्होंने भी काम के आधार पर मतदान किया।
दोस्त वीडियो भेजते, फिर उम्मीदवार के काम की जानकारी लेती
नॉर्थ कैंपस की प्रथम वर्ष की छात्रा सौम्या ने बताया कि इंस्टाग्राम रील के जरिए उन्हें उम्मीदवारों के नाम और उनके मुद्दों की जानकारी मिली। दोस्त भी अक्सर वीडियो साझा करते थे। हालांकि, किसी प्रत्याशी की रील देखने के बाद वह दोस्तों से उसके काम के बारे में पूछती थीं। उनके लिए सोशल मीडिया उम्मीदवार तक पहुंचने का जरिया रहा, लेकिन उसके आधार पर पूरी राय बनाना पर्याप्त नहीं था।
रील से नहीं, पिछले काम से उम्मीदवार को समझना जरूरी
तृतीय वर्ष के छात्र कुणाल का कहना है कि रील के जरिए उम्मीदवारों को जानना आसान है, लेकिन उनके पिछले काम और कैंपस में सक्रियता के बारे में जानकारी लेना भी जरूरी है। उपलब्ध जानकारी और अपने अनुभव के आधार पर मतदान करना चाहिए। हालांकि, उनका मानना है कि हर उम्मीदवार के बारे में पूरी जानकारी जुटा पाना आसान नहीं होता। नए मतदाताओं के अनुभव बताते हैं कि डूसू चुनाव में सोशल मीडिया ने उम्मीदवारों तक पहुंच जरूर आसान की, लेकिन रीलों और शॉर्ट वीडियो से आगे बढ़कर मुद्दों, काम और सक्रियता की जानकारी हासिल करना भी उनकी चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा रहा।