लोकसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी भारतीय जनता पार्टी में विद्रोह की आशंका तेज हो गई है। आम चुनाव लड़ने का सपना संजोए दिल्ली के विधयाकों ने टिकट न मिलने पर विद्रोह के संकेत दिए हैं।
सोमवार को दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्षवर्धन ने कहा कि विधायकों को लोकसभा चुनाव में टिकट देने के बारे में अंतिम फैसला पार्टी का संसदीय बोर्ड करेगा। हालांकि यह उनकी निजी राय है कि विधायकों को आम चुनावों में हिस्सा नहीं लेना चाहिए।
हर्षवर्धन के इस बयान का असर यह हुआ कि सांसद बनने का सपना देख रहे विधायकों ने बगावती तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं।
'दिल्ली विधानसभा चुनाव से लें सबक'
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर बीजेपी ने विधायकों को आम चुनाव में टिकट नहीं दिया तो स्थिति बहुत ही गंभीर बनने वाली है।
उन्होंने कहा कि बीजेपी ने पार्षदों के विधानसभा चुनाव लड़ने पर रोक लगाई थी, जिसका नतीजा सामने है और दिल्ली में पार्टी को सीटें कम मिलीं।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे नियमों के अलग हटकर पार्टी को उन विधायकों को टिकट देना चाहिए जो चुनाव जीत सकते हैं, वरना इसका बुरा असर चुनाव परिणाम में स्पष्ट दिखेगा।
'दिल्ली में बनेगी बीजेपी की सरकार'
बीजेपी के वरिष्ठ नेता ने कहा कि विधायकों को लोकसभा चुनाव का टिकट नहीं देने के पीछे हर्षवर्धन की निजी राय थी, क्योंकि दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लागू है और बीजेपी लोकसभा चुनाव के बाद दिल्ली में सरकार बनाने की उम्मीद कर रही है।
लोकसभा का टिकट मांगने वाले एक और विधायक ने कहा कि आम चुनाव में विधायकों को बाहर करने का सीधा असर चुनाव परिणामों पर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि पार्टी किसी एक के निर्णय से नहीं चलती। उन्हें उम्मीद है कि जो भी विधायक आम चुनाव लड़ने का मन बना चुके हैं वो टिकट पाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
दिल्ली में होने वाला है बड़ा बदलाव!
बीजेपी नेता ने यह भी कहा कि दिल्ली प्रदेश भाजपा के संगठन में जल्द ही बड़े बदलाव की उम्मीद है क्योंकि दिल्ली में बैठे आरएसएस के लोग कई राज्य पदाधिकारियों को बदलने का मन बना चुके हैं।
उधर, हांगकांग दौरे से वापस आए प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन ने सोमवार को सभी विधायकों और पार्टी नेताओं के साथ बैठक कर चुनाव प्रचार में तेजी लाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि 'एक नोट एक वोट' अभियान में सभी की भागीदारी बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसलिए सभी लोग अपने-अपने क्षेत्र में घर-घर जाकर पार्टी की नीतियों और चुनावी मुद्दों का प्रचार कर लोगों को मतदान के लिए प्रेरित करें।