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पढ़िए GST पर जेटली के ये बोल, टैक्स स्लैब पर अधिकारियों से बातों-बातों में दे गए ये बड़ा संकेत

Mon, 02 Oct 2017 09:43 AM IST
बयूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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अरुण जेटली (फाइल फोटो)
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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि राजस्व में बढ़ोतरी होने के बाद जीएसटी का स्लैब कम किया जा सकता है। राजस्व सरकार के लिए लाइफलाइन है। इसके माध्यम से देश विकासशील से विकसित राष्ट्र में बदल सकता है। अभी वस्तुओं एवं सेवाओं को 28 प्रतिशत तक के टैक्स स्लैब में बांटा गया है।   
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यह रविवार को फरीदाबाद स्थित नेशनल एकेडमी ऑफ कस्टम्स, इनडायरेक्ट टैक्स एंड नारकोटिक्स (नासेन) में स्थापना दिवस एवं दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने कॉफी टेबल बुक और ईयर बुक ऑफ नासेन का विमोचन किया।

इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि हमारे पास सुधार की गुंजाइश है। एक बार राजस्व के मामले में तटस्थ होने पर बड़े आर्थिक सुधारों के बारे में विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि कर विभाग के अधिकारियों को इस पर काम करना चाहिए कि कर के दायरे में अधिक से अधिक लोग आए। कर के दायरे में लाने के लिए लोगों पर गैर जरूरी दबाव नहीं डाला जाना चाहिए।
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डेमो पिक
भारत में अप्रत्यक्ष करों में बढ़ावा हो रहा है। अर्थव्यवस्था में वृद्धि हो रही है। प्रत्यक्ष कर एक खास वर्ग देता है, लेकिन अप्रत्यक्ष करों का भार सभी पर पड़ता है। इसके लिए हम वित्तीय नीतियों में आवश्यक वस्तुओं पर कम टैक्स लगे इसकी कोशिश करते हैं। एक बार बदलाव स्थापित हो जाएंगे, फिर हमारे पास सुधार के लिए जगह होगी।  

वित्त मंत्री ने कहा कि जो लोग देश के विकास की मांग करते हैं, उन्हें जरूरत पड़ने पर उसकी कीमत चुकानी होगी। विकास के लिए राजस्व की जरूरत होती है। हमें ईमानदारी से खर्च किया जाना चाहिए। एक समय भारतीय प्रशासनिक सेवा को एलीट माना जाता था। अब इसकी भौगोलिक एवं सामाजिक सीमाएं खत्म हो रही है। यह भारतीय समाज में आए बड़े बदलाव का परिचायक है।

क्या है रेवेन्यू न्यूट्रल 
रेवेन्यू न्यूट्रल ऐसी टैक्स प्रक्रिया है जिससे सरकार नई कर व्यवस्था लागू करने के बावजूद पहले जितना ही राजस्व प्राप्त करती है। इसके तहत सरकार किसी एक समूह पर टैक्स कम कर सकती है लेकिन दूसरे समूह पर बढ़ा सकती है। इससे सरकार के पहले से हासिल हो रहे राजस्व में कमी नहीं आती। 

राजस्व में कमी क्यों?  
जुलाई में जीएसटी से सरकार को 94 हजार 63 करोड़ रुपये हासिल हुए थे। लेकिन अगस्त में यह राजस्व 3.6 फीसदी घट कर 90 हजार 669 करोड़ रुपये रह गया। दरअसल जुलाई, अगस्त में जीएसटीएन के क्रैश हो जाने की वजह से बड़ी तादाद में कारोबारी अपना टैक्स रिटर्न नहीं भर पाए थे। इस वजह से राजस्व में कमी हुई। 
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डेमो पिक
जीएसटीएन को लेकर दिक्कतें
जीएसटी रिटर्न दाखिल करने के लिए बने इंटरनेट नेटवर्क की दिक्कते आ रही हैं। कुछ दिक्कतें इस तरह हैं।
1.आईटी सपोर्ट नहीं
2. धीमी इंटरनेट सेवा
3. जीएसटीएन सर्वर की क्षमता कम 
4. ओटीपी मिलने में दिक्कत
5. महीने में तीन और साल में 36 रिटर्न भरने की बाध्यता 

तकनीकी खामियां दूर करने की कोशिश 
सरकार ने जीएसटीएन की तकनीकी खामियों को दूर करने के लिए वित्त मंत्रियों और आला अधिकारियों की एक कमेटी बनाई है। यह कमेटी इन तकनीकी दिक्कतों को सुधारने की प्रक्रिया पर नजर रखेगी। कमेटी की कुछ बैठकें हो चुकी हैं। 
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