मुंबई के एलफिंस्टन रेलवे स्टेशन के फुटओवर ब्रिज पर मची भगदड़ में शुक्रवार को 22 जानें मौत के मुंह में समा गई। इस दर्दनाक हादसे में 35 लोग घायल हो गए। घटना के बाद से सरकारी महकमों में जबरदस्त हलचल मची है। एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक देश के 10 बड़े जिलों के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों का निरिक्षण शुरू हो गया है। इसका असर शुक्रवार को हादसे के कुछ घंटों बाद दिल्ली में भी देखने को मिला।
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एचटी की रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई में हादसा हुए अभी कुछ घंटे ही बीते थे कि यहां उत्तरी रेलवे के दिल्ली प्रभाग के अधिकारियी स्टेशनों पर बने फुट ओवरब्रिजों (एफओबी) का निरीक्षण करने के लिए पहुंच गए। लेकिन सवाल ये उठता है कि इन अफसरों को अपने कार्यालय छोड़ने के लिए क्या ऐसी ही किसी घटना का इंतजार था। उन्होंने एक आदेश जारी करते हुए कहा कि प्लेटफार्मों पर बने फुट ओवरब्रिज में किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं होगा।
एलफिंस्टन स्टेशन हादसे के बाद टूटी अफसरों की नींद
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि उत्तरी रेलवे के दिल्ली प्रभाग के अतंर्गत 213 रेलवे स्टेशनों पर बने करीब 250 फुट ओवरब्रिज आते हैं। नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर आने-जाने वाले कम से कम 4 लाख यात्री हर दिन इन्हीं ओवरब्रिज़ का उपयोग करते हैं। याद हो नवंबर 2004 में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर प्लेटफार्म 3 पर भगदड़ में पांच महिलाओं की मौत हो गई थी। घटना के दिन व उस पूरे सप्ताह तक छठ की वजह से यात्रियों की भारी भीड़ स्टेशन पर थी। दिल्ली रेलवे स्टेशन सबसे व्यस्त स्टेशनों में से एक हैं। आने वाले त्यौहार के मौको पर यहां यात्रियों की संख्या 6 लाख से अधिक हो सकती है। ऐसे में जरूरत है कि प्रशासन पहले से सारे बंदोबस्त कर ले ताकि मुंबई के एलिंफस्टन स्टेशन जैसी कोई अनहोनी न हो।
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बता दें फिलहाल, दिल्ली विभाग के क्षेत्रीय प्रबंधक आर.एन. सिंह ने शुक्रवार को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर तीन फुटओवरब्रीज का निरीक्षण किया। जबकि सिंह ने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन के पुलों का निरीक्षण शनिवार को किए जाने की बात कही है। उन्होंने कहा " ऐसी अनहोनी से बचने के लिए पूरी कोताही बर्ती जा रही है जिसके लिए एक नोटिस जारी कर दिया गया है कि यात्रियों में पैनिक न पैदा हो इसलिए प्लेटफॉर्म बदलने की कोई अंतिम क्षण घोषणा नहीं की जाए। क्योंकि ऐसा करने से यात्री प्लेफॉर्म बदलने के लिए भागने लगते है। अब ऐसी कोई घोषणा रेलवे द्वारा नहीं की जाएगी। यह हमेशा आतंक का कारण बनता है। अराजक स्थिति में ही ऐसे हादसे होते हैं। इसके अलावा, रेलवे सुरक्षा बल के कर्मियों को पुल पर तैनात किया जाएगा। वे यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं कि यदि पुल पर भीड़ बढ़ती है तो उन्हें व्यवस्था बनाए रखनी है।
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मई 2010 में नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भी मची थी भगदड़
मई 2010 में ही नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर ऐसी ही अंतिम क्षण घोषणा से रेलवे प्लेटफॉर्म पर भगदड़ मच गई थी जिसमें दो यात्रियों की मौत हो गई। त्योहारी सीजन के दौरान दिल्ली के सभी रेलवे स्टेशनों अफरा-तफरी जैसी स्थिति रहती है। रेलवे अधिकारियों ने कहा कि वे इस त्योहारी सीजन के दौरान कोई रिस्क नहीं लेंगे और सावधानीपूर्वक विनियमन करेंगे। उन्होंने कहा कि भीड़ और भगदड़ को रोकने के लिए कुछ फुट ओवरब्रिज पर दो लेन तैयार की जाएंगी। स्टेशनों पर इस सप्ताह पहले से ज्यादा भीड़ बढ़ी है क्योंकि दशहरा पर्व का मौका है।
आर.एन. सिंह ने बताया अक्टूबर के दौरान दिवाली और छठ की वजह से पहले ही संख्या बढ़ने की उम्मीद जताई है। साथ ही यह भी जानकारी दी कि नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली और निजामुद्दीन जैसे मेगा टर्मिनलों में पुलों का निरीक्षण किया जा रहा है। आनंद विहार में कोई फुट ओवर ब्रिज नहीं है लेकिन एक सबवे जरूर है। सिंह ने कहा वहां आरपीएफ कार्मिक तैनात हैं चिंता करने का कोई बात नहीं है।
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सड़कों पर बने पुल सुरक्षित
रेलवे स्टेशनों बने पुलों को मॉनिटर करने की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन सड़कों पर उनकी अपेक्षा पुल ज्याद सुरक्षित हैं क्योंकि ज्यादातर दिल्ली के निवासियों को जे-वाकिंग यानी समतल चलना पसंद करते हैं। वे फुट ओवर ब्रिज कम इस्तेमाल करते हैं। वहीं इसके संबंध में ट्रैफिक अधिकारियों का कहना है कि यह सड़क दुर्घटना में होने वाली मौतों में से एक मुख्य कारण है। रिंग रोड-आईएसबीटी कश्मीरी गेट और मजनु का टिला सबसे ज्यादा मौत वाले इलाकों में हैं। यहां ऐसी मौतों के सबसे ज्यादा मामले सामने आए है। यहां सबवे और फुट ओवरब्रिज बने हैं लेकिन इनका इस्तेमाल नहीं किया जाता है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने अध्ययन के बाद अपनी रिपोर्ट में पिछले साल यह जानकारी दी थी। बता दें कि दिल्ली शहर में 73 फुट ओवर ब्रिज हैं और सरकार 60 से अधिक निर्माण करने की योजना बना रही है। उनमें से ज्यादातर एस्केलेटर और लिफ्टों के लिए सुविधा दी जाएगी ताकि लोग इनका उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित हों।
सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट के प्रमुख वैज्ञानिक एस वेलमुर्गन ने कहा, "एफओबी का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, इसलिए चिंता करने का एक कारण भी है, क्योंकि अधिकारियों को इसके रखरखाव को नजरअंदाज करने की भी प्रवृत्ति है।" उन्होंने कहा कि अधिकारियों को सड़कों पर बने डिवाइडर उच्च रखना चाहिए ताकि लोगों को एफओबी का उपयोग करने के लिए मजबूर किया जाए। इसके अलावा, 50 साल से अधिक पुराने एफओबी की सुरक्षा लेखा परीक्षा होनी चाहिए, खासकर पुरानी दिल्ली में।
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ज्ञात हो मुंबई के एलफिंस्टन रेलवे स्टेशन के फुटओवर ब्रिज पर मची भगदड़ में शुक्रवार को 22 लोगों की मौत हो गई। इस दर्दनाक हादसे में 35 लोग घायल हो गए। हादसा सुबह करीब 10:40 बजे हुआ। उस वक्त बारिश हो रही थी और फुटओवर ब्रिज पर काफी भीड़ थी। अचानक बारिश होने के कारण लोग ब्रिज पर इंतजार कर रहे थे। बारिश रुकने पर लोग जल्दी से वहां निकलने लगे, इससे भगदड़ मच गई।
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सोशल मीडिया पर कई तस्वीरें चल रही हैं जिनमें लोग सीढ़ियों और ब्रिज पर फंसे हुए दिख रहे हैं। हादसे के कई वीडियो भी हैं जिनमें लोग अपनी जान बचाने का हर जतन कर रहे हैं। कुछ लोग पुल टूटने की अफवाह को हादसे की वजह बता रहे हैं। वहीं, पुलिस शॉर्ट सर्किट से हुए धमाके को भगदड़ की वजह बता रही है।