ब्रेन स्ट्रोक में इलाज के लिए अधिकतम साढ़े चार घंटे गोल्डन ऑवर माने जाते हैं। ब्रेन स्रेक के लक्षण होने पर एक घंटे के भीतर महिला को परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे, जिससे तुरंत इलाज कर उन्हें विकलांग होने से बचा लिया गया। डॉक्टरों के मुताबिक ब्रेन स्ट्रोक में हर मरीज यदि वक्त पर अस्पताल पहुंच जाए तो विकलांगता समेत उसके जान के संकट को टाला जा सकता है।
सेक्टर- 62 स्थित फोर्टिस अस्पताल में नोएडा निवासी मधु रावत (52) को 26 अक्तूबर को इलाज के लिए लाया गया था। किचन में काम करने के दौरान चेहरे में टेढ़ापन, कमजोरी, बेहोशी और उनके शरीर के एक हिस्से में गतिशीलता बंद हो गई थी।
अस्पताल के प्रिंसिपल कंसल्टेंट न्यूरोलॉजी डॉ. संजय कुमार सक्सेना ने बताया कि महिला के दिमाग की एक नस में रक्त का थक्का जम गया था। रक्त का थक्का घोलने का इंजेक्शन दिया गया। वह पूरी तरह से ठीक हैं। उन्होंने बताया कि हफ्ते में अस्पताल आने वाले औसतन 11 से 12 ब्रेन स्ट्रोक के मरीजों में एक ही दो ऐसे होते हैं, जो गोल्डन ऑवर में अस्पताल पहुंचते हैं।
इससे पहले 60 साल की मीरा गांगुली को ब्रेन स्ट्रोक के दो घंटे के भीतर अस्पताल लाया गया था। उन्होंने बताया कि देर से पहुंचने वाले मरीजों के शरीर के खराब हो चुके हिस्से को वापस ठीक करना मुश्किल होता है।