मंदिर में श्रीराम दरबार की विधि विधान के साथ प्राण प्रतिष्ठा की गई। यहां भी प्राण प्रतिष्ठा उसी समय हुई जब अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम चल रहा था। मंदिर के महंत रामदास महाराज ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा के लिए 11 पंडितों को बुलाया गया था। सभी रस्मों को पूरा करने के बाद भगवान की आंखों से पट्टी खोली गई और उनका श्रृंगार किया गया। जिस समय अयोध्या में श्रीराम प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा हुई है। उसी समय रावण की जन्मस्थली में भी श्रीराम विराजे हैं।
मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के साथ अन्य धार्मिक अनुष्ठानों का भी आयोजन किया गया। दोपहर को श्रीराम दरबार की प्राण प्रतिष्ठा के बाद हवन, सुंदरकांड का पाठ किया गया और शाम को भगवान की आरती की गई। इसके साथ ही शाम को मंदिर पर दीपक जलाकर दिवाली मनाई गई। इस दौरान पूरा गांव जय श्रीराम के उद्घोष से गूंजता रहा। इसके बाद सभी ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया।
शनि मंदिर में विराजे खाटू श्याम
सेक्टर-20 स्थित हनुमान मंदिर में भी इस दिन को यादगार बनाने के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। मंदिर में हनुमान के साथ श्रीराम दरबार विराजता है। लेकिन प्राण प्रतिष्ठा वाले दिन हनुमान मंदिर में खाटू श्याम और लक्ष्मी नारायण की मूर्ति की स्थापना की गई। इस दौरान शोभायात्रा निकाली गई और सुंदर कांड का पाठ किया गया व शाम को मंदिर में दीपोत्सव मनाया गया।