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पत्थरबाजों के निशाने पर वीआईपी ट्रेनें

Thu, 20 Aug 2015 12:58 AM IST
राजीव शर्मा/अमर उजाला, गाजियाबाद
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खुराफाती बच्चों में आपस की होड़ और निशानेबाजी की शर्त आरपीएफ और रेलवे के लिए परेशानी बन गई है। शर्त के चक्कर में कुछ खुराफाती बच्चे राजधानी और शताब्दी जैसी वीवीआईपी ट्रेनों के शीशे तोड़ रहे हैं।
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लगातार हो रही ऐसी घटनाओं के बाद आरपीएफ ने इन वीआईपी ट्रेनों की सुरक्षा बढ़ा दी है। हिंडन नदी से गोशाला अंडरपास तक आरपीएफ कांस्टेबल खड़े होकर इन ट्रेनों को सुरक्षित गुजारते हैं।

इन पत्थरबाजों पर निगरानी के लिए आरपीएफ को रोजाना दो घंटे इस क्षेत्र में गश्त करनी पड़ रही है। गनीमत है कि यह पत्थरबाजी आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने के लिए नहीं की जा रही।
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खुराफाती बच्चे महज निशाना लगाने के चक्कर में वीआईपी ट्रेनों के शीशों पर पत्थर फेंकते हैं। लेकिन बच्चों की इस शरारत से रेलवे को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

वहीं यात्रियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। दरअसल, गाजियाबाद स्टेशन का आउटर होने की वजह से हिंडन नदी के पास से गोशाला फाटक तक आते-आते ट्रेनों की रफ्तार धीमी हो जाती है। ऐसे में ट्रेनों को निशाना बनाना बेहद आसान हो जाता है।

मुनादी भी करा चुकी आरपीएफ
ट्रेनों पर पत्थरबाजी से परेशान आरपीएफ गोशाला फाटक के पास की कालोनियों में मुनादी भी करा चुकी है, ताकि बच्चे पत्थर फेंकने की घटनाएं बंद कर दें। बावजूद इसके घटनाएं नहीं रुकीं।

रोजाना छह कांस्टेबल पास कराते हैं वीवीआईपी ट्रेनें
गोशाला फाटक से हिंडन तक छह कांस्टेबल तैनात रहते हैं। ये कांस्टेबल शाम साढ़े 4 बजे से साढ़े 6 बजे तक थोड़ी-थोड़ी दूरी पर खड़े हो जाते हैं। इस दौरान कानपुर शताब्दी, डिब्रूगढ़ राजधानी समेत कई वीआईपी ट्रेनें गुजरने के बाद कांस्टेबल वहां से जाते हैं।
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पुरानी घटनाएं
भुवनेश्वर राजधानी के शीशे तोड़े
हावड़ा राजधानी पर पत्थरबाजी कर शीशे तोड़े गए
करीब एक महीना पूर्व कानपुर शताब्दी पर पत्थरबाजी हुई
सासाराम गरीबरथ पर भी दो महीने पहले हुई थी पत्थरबाजी
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